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डीएम ने कासिमाबाद के एडीओ पंचायत का किया स्थानांतरण

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कासिमाबाद। कासिमाबाद विकासखंड के सफाई कर्मियों एवं ग्राम प्रधानों द्वारा कोविड-19 में मुख्यमंत्री राहत कोष में दी गई धनराशि में गबन किया गया था। ग्राम प्रधानों तथा सफाई कर्मियों से कुल 5, 78, 500 धनराशि वसूल की गई थी। इसमें से केवल 1, 00, 009 रुपये जमा होने का प्रमाण सफाई कर्मियों के पास है। बाकी पैसे की शिकायत मिलने पर डीएम ने जांच बैठाई। इसमें ग्राम विकास अधिकारी को एडीओ पंचायत कासिमाबाद के पद पर की गई अवैधानिक नियुक्ति को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ओमप्रकाश आर्य ने बृहस्पतिवार को बड़ी कार्रवाई की। उन्होंने एडीओ पंचायत को तत्काल प्रभाव से कासिमाबाद से हटा दिया और उनके स्थान पर भांवरकोल में तैनात एडीओ पंचायत शेषनाथ यादव को कासिमाबाद के लिए स्थानांतरित कर दिया। इसी क्रम में इस मामले की जांच कर रहे उप जिलाधिकारी कासिमाबाद ने सभी पक्षों को नोटिस भेजकर अपना पक्ष रखने को कहा है। जिलाधिकारी के इस कार्रवाई से पूरे विकासखंड में हड़कंप मचा हुआ है।
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कोरोना महामारी को देखते हुए उच्चाधिकारियों के निर्देश पर एडीओ पंचायत कासिमाबाद अशोक यादव ने विकासखंड के सभी 232 सफाई कर्मियों से एक हजार रुपये की सहयोग राशि नगद लिया था। इसी प्रकार कुल 99 ग्राम प्रधानों से 3500 रुपये नगद एक माह का मानदेय लिया गया था। यानी सफाई कर्मियों से 2, 32, 000 तथा ग्राम प्रधानों से ख 3,46, 500 की धनराशि नगद वसूल की गई थी। इसमें सफाई कर्मियों से वसूली गई धनराशि का मात्र एक लाख नौ हजार रुपये ही जमा हुआ। जबकि ग्राम प्रधानों की धनराशि का कोई लेखा-जोखा नहीं मिला है। देखा जाए तो कोविड-19 फंड में आधे से भी कम धनराशि भेजी गई है। यही नहीं सफाई कर्मियों एवं प्रधानों से चेक से न लेकर नगद पैसा लिया गया। इसे गंभीरता से लेते हुए ‘अमर उजाला’ ने 19 मई के अंक में ‘राहत कोष में दी गई राशि में घोटाले की बू’ शीर्षक से प्रमुखता से खबर प्रकाशित किया था। इसके बाद यह मामला तूल पकड़ने लगा। भाजपा मंडल अध्यक्ष संतोष गुप्ता ने जिलाधिकारी के साथ मुख्यमंत्री और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष को पत्र लिखकर पूरे प्रकरण से अवगत कराते हुए सभी बिंदुओं पर जांच कराने का अनुरोध किया था । बताया जाता है कि अमर उजाला की लगातार खबरों के बाद जिलाधिकारी ने इसे गंभीरता से लेते हुए पूरे प्रकरण की जांच मुख्य विकास अधिकारी को सौंपा था । बाद में मुख्य विकास अधिकारी ने यह जांच उप जिलाधिकारी कासिमाबाद रमेश मौर्य को दे दिया था । इसी बीच मुख्यमंत्री के यहां से भी पत्र जिलाधिकारी को कार्यवाही हेतु मिल गया । जिलाधिकारी ओम प्रकाश आर्य ने गुरुवार की शाम को एडीओ पंचायत अशोक यादव को कासिमाबाद से हटाकर जिला से संबद्ध कर दिया । भाजपा मंडल अध्यक्ष संतोष गुप्ता का आरोप था कि एडीओ पंचायत अशोक यादव की नियुक्ति पूरी तरह से अवैधानिक है क्योंकि उनका मूल पद ग्राम विकास अधिकारी है । उच्चाधिकारियों ने शासनादेश का उल्लंघन करते हुए उन्हें किसी ग्राम पंचायत का पदभार न देकर सीधे सहायक विकास अधिकारी पंचायत का पदभार दे दिया जो शासनादेश के साथ नियमावली का सरासर उल्लंघन किया गया था। हालांकि अभी उनके स्थानांतरण से अभी यह मामला शांत नहीं हुआ है । इसमें उप जिलाधिकारी कासिमाबाद रमेश मौर्य ने संबंधित सभी पक्षों को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने को कहा है । अब देखना है कि उप जिला अधिकारी की जांच में जो घोटाला किया गया है उसमें क्या तथ्य निकलकर आते हैं । वैसे सहायक विकास अधिकारी पंचायत के पद से अशोक यादव को यहां से हटाने से पूरे विकास खंड में हड़कंप मच गया है।
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