शहर के पुलिस लाइन रोड पर पानी लेकर घर जाते बच्च
दर्जनभर गांवों के लोग इस भीषण गर्मी में पानी के लिए हाहाकार मच गया है। कारण छह माह से दो जगहों पर पाइप लाइन का टूटना बताया जा रहा है। पेयजलापूर्ति बाधित होने से ग्रामीणों को प्राकृतिक स्रोतों का सहारा लेना पड़ रहा है। रही बात विभाग की तो शिकायत के बाद भी अधिकारी और कर्मचारी लापरवाह बने हैं।
जलनिगम की ओर से वर्ष 1980 में कासिमाबाद-यूसुफपुर मार्ग पर डेढ़ करोड़ की लागत से बनवाई गई पानी की टंकी इन दिनों लोगों के लिए बेमतलब साबित हो रही है। वजह दो जगहों पर पाइप लाइन टूट जाने से टंकी से संबंधित कई गांवों में नल की टोटियां सूख गई हैं। भीषण गर्मी के इस मौसम में लोगों को पेयजल के लिए तरसना पड़ रहा है।
ब्लाक के स्थानीय गांव और मिर्जापुर मेख, सुकहा, सोनबरसा, धरवार कला, शहबाजपुर, विशुनपुर, बड़ागांव सहित दर्जनभर गांव में पेयजलापूर्ति ठप है। ग्रामीण गांवों में लगे हैंडपंपों से काम चला रहे हैं। नेशनल इंटर कालेज के पास और कासिमाबाद-सिधागरघाट पर पाइप लाइन करीब छह माह से टूटी पड़ी है। टूटी पाइप लाइन की मरम्मत के लिए गांव के लोगों ने कई बार संबंधित अधिकारियों से शिकायत की इसके बावजूद भी पाइप लाइन की मरम्मत नहीं कराई गई।
इस संबंध में छोटे लाल चौरसिया, संतोष गुप्ता, मनीष कुमार सिंह, मनोज सिंह, श्यामनारायण सिंह आदि ने बताया कि पाइप लाइन टूटने से पानी की आपूर्ति ठप पड़ी हुई है। मरम्मत के लिए कई बार संबंधित विभाग के अधिकारियों से शिकायत की गई। इसके बावजूद भी टूटी पाइप लाइन की मरम्मत नहीं कराई गई। शहर के भी कई इलाकों मेंलोगों को पानी के लिए भागदौड़ करनी पड़ रही है। अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही के चलते पानी की आपूर्ति गांव और शहर में पूरी तरह से चरमरा गई है।