गाजीपुर/ औड़िहार। कहते हैं कदम चूम लेती है चल करके मंजिल, मुसाफिर अगर अपनी हिम्मत न हारे। ऐसा ही एक नाम है सैदपुर नगर क्षेत्र के वार्ड आठ इंदिरा नगर में एक गरीब परिवार में पले बढ़े धर्मेंद्र कुमार का, जो समाज के लिए मिसाल बने हैं। प्रतिवर्ष सैकड़ों बालक-बालिकाओं को जूनियर स्तर तक नि:शुल्क शिक्षा दिलाने का कार्य करते हुए उनका मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं। यही नहीं पर्यावरण प्रदूषण के लिए वृक्षारोपण और गौरैया संरक्षण के कार्य के साथ-साथ गंगा की सफाई में भी बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते हैं।
बचपन में मां का साया सिर से उठ गया। गरीबी से संघर्ष करते हुए पिता कालिका प्रसाद ने धर्मेंद्र के लिए माता-पिता दोनों की भूमिका निभाई। परिवार की स्थितियों को देखते हुए धर्मेंद्र ने जी-जान से पढ़ाई की और ग्रेजुएशन के बाद एलएलबी कर जन सेवा को जिंदगी का मकसद बना लिया। वृद्ध पिता की सेवा करने के लिए वह घर के पास बच्चों को एकत्र कर नि:शुल्क शिक्षा देने लगे। इससे बहुत से लोग उनके कायल हो गए। कई लोगों ने उनके शिक्षादान कार्य में हाथ बंटाया और एक चिल्ड्रेन स्कूल शुरू कराया। जिसमें तमाम बालक बालिकाएं जूनियर स्तर तक नि:शुल्क शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
धर्मेंद्र ने अपने को यहीं तक सीमित नहीं रखा वह सामाजिक सरोकारों से भी गहरा वास्ता रखते हैं। चाहे पर्यावरण प्रदूषण के लिए वृक्षारोपण का मामला हो या गौरैया संरक्षण का कार्य या गंगा सफाई का मुद्दा। वह सभी कार्यों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते हैं। साथ ही लोगों की भलाई, बुजुर्गों की सेवा में भी जुटे रहते हैं। बालकों के उत्साह के लिए उन्हें कॉपी-किताब और जरूरत पड़ने पर फल एवं टाफी देकर हौसला आफजाई करते हैं। उनके कार्यों को देखते हुए सैदपुर के प्रबुद्ध जन उनके कार्यों में हाथ बंटाते हैं और अक्सर सम्मानित भी करते हैं। हाल ही में युवा शक्ति संघ ने उनको प्रशस्ति पत्र और प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया है।
साधारण परिवार में पोषित होकर भी धर्मेंद्र कुमार ने अपने को सामाजिक सरोकारों से जोड़ रखा है। इनके द्वारा पर्यावरण प्रदूषण से लगायत शिक्षा के क्षेत्र में किया जा रहा योगदान सराहनीय है। - सुनील यादव अध्यक्ष युवा शक्ति संघ
आज के आर्थिक दौर में भी धर्मेंद्र कुमार ने जिस तरह छोटे बच्चों को नि: शुल्क शिक्षा देकर मजलूम बस्ती में शिक्षा की अलख जगाई है और वहां रहने वाले बच्चों के भविष्य को संवारने का काम कर रहे हैं वह समाज के लिए प्रेरणा स्रोत है। - शमशेर सिंह शिक्षक