धान की अधिक आवक से मंडी में लगा जाम
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जिले में धान की खरीद में तेजी नहीं आ पा रही है। करीब एक महीना बीत जाने के बाद भी अभी तक 1869 मीट्रिक टन से कुछ ज्यादा की खरीद की जा सकी है। चिंता की बात तो यह है कि एक दर्जन से अधिक क्रय केंद्रों की बोहनी तक नहीं हो सकी है। ऐसे में निर्धारित अवधि में लक्ष्य प्राप्त करना टेढ़ी खीर साबित होगा। जिलाधिकारी की ओर से फिर से धान की कुटाई करने वाली मिलों का सत्यापन कराया जाएगा।
शासन की ओर से इस वर्ष जिले को धान खरीद का बंपर लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस बार 2 लाख 1 हजार 870 मीट्रिक टन की खरीद की जाएगी। यह खरीद विभिन्न संस्थाओं के 72 क्रयकेंद्रों के माध्यम से की जाएगी। इसमें विपणन के 17, पीसीएफ के 11, प्राइवेट प्लेयर्स के 21, एनसीसीएफ के 4, कर्मचारी कल्याण निगम एवं नेफेड के 3-3, यूपी एग्रो और एफसीआई के 2-2 के अलावा हाल ही में खुले पंजीकृत सहकारी समिति के 9 क्रयकेंद्र हैं। कागज पर तो खरीद भले ही पहली नवंबर से शुरू हो गई लेकिन देर से आवक होने के कारण जिले में धान की खरीद नवंबर माह के दूसरे सप्ताह में शुरू हुई। करीब एक महीना बीत जाने के बाद भी खरीद के काम में तेजी नहीं आ पा रही है। मिली जानकारी के अनुसार गुरुवार की शाम तक विभिन्न संस्थाओं की तरफ से 1869.389 एमटी की खरीद की गई थी। यह खरीद 217 किसानों से की गई है। अब तक विपणन विभाग ने 1297.845 एमटी, एनसीसीएफ 170.4, यूपी एग्रो 23.10, कर्मचारी कल्याण निगम 339.30, प्राइवेट प्लेयर्स 26.504 एवं एफसीआई की तरफ से 12.24 एमटी धान की खरीद की गई है। धान खरीद का समर्थन मूल्य शासन की ओर से 1470 रुपये प्रति कुंतल निर्धारित किया गया है। खरीद की इस दयनीय स्थिति से निर्धारित अवधि 28 फरवरी तक लक्ष्य प्राप्त कर पाना आसान नहीं होगा।