गाजीपुर। नए वित्तीय वर्ष में केंद्र सरकार की ओर से वीबी-जी राम जी (विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन ग्रामीण) को लागू करने की तैयारियां तेज हो गई हैं। इसके तहत मनरेगा की वेबसाइट को अपडेट किया जा रहा है। इसी प्रक्रिया में जिले की ग्राम पंचायतों में पहले से स्वीकृत कार्यों की वर्क आईडी बंद की जा रही है। इससे पंचायतों में विकास कार्य ठप हो गए हैं और ग्राम प्रधानों की परेशानी बढ़ गई है। वहीं, मनरेगा मजदूरों की होली फीकी होने की आशंका बढ़ गई है।
जिले में 1238 ग्राम पंचायतें हैं और करीब 334110 जाॅब कार्डधारक है। इनमें 1.67 लाख काम मांगने वाले सक्रिय मनरेगा मजदूर हैं। वर्क आईडी बंद होने के बाद से रोजगार सृजन पर भी असर पड़ रहा है। प्रधानों का कहना है कि जिन कार्यों की पहले से योजना बनाई गई थी, वे अब आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं। इसके चलते तालाब खुदाई, सड़क मरम्मत, इंटरलॉकिंग, नाली निर्माण जैसे कच्चे-पक्के कार्य रुके हुए हैं।
प्रधानों के अनुसार वित्तीय वर्ष के अंत में तकनीकी कारणों से कई कार्य शुरू नहीं हो सके थे। अब अचानक वर्क आईडी बंद होने से पहले से तय कार्यों पर भी रोक लग गई है। प्रधानों का कहना है कि वर्क आईडी बंद होने से श्रमिकों को काम देने की चुनौती बढ़ गई है।
इधर, मनरेगा में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए कार्ड धारकों की ई-केवाईसी भी कराई जा रही है। रोजगार सेवक गांव-गांव जाकर वर्किंग मनरेगा कार्ड धारकों की ईकेवाईसी कर रहे हैं। जिले में 3.34 लाख वर्किंग कार्ड में से अब तक 72 प्रतिशत की ई-केवाईसी पूरी हो चुकी है। ईकेवाईसी के बाद वही श्रमिक कार्य कर सकेगा, जिसकी आईडी सत्यापित होगी। डीसी मनरेगा विजय कुमार ने बताया कि नई प्रक्रिया लागू करने की तैयारी की जा रही है। जल्द ही नई गाइडलाइन जारी होगी। इसके बाद नए कार्यों की स्वीकृति और वर्क आईडी निर्माण की प्रक्रिया दोबारा शुरू कर दी जाएगी।