उत्तर प्रदेश बार कौंसिल के आह्वान पर सात सूत्री मांगों को लेकर शुक्रवार
को जिले भर के अधिवक्ता न्यायिक कार्य से विरत रहे। इसके चलते सदर कचहरी,
सैदपुर, जमानिया, जखनिया तथा मुहम्मदाबाद तहसील में न्यायिक कार्य पूरी तरह
ठप रहा। इस दौरान अधिवक्ताओं ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी
नरेंद्र सिंह पटेल को सौंपा। साथ ही चेतावनी दी कि यदि मांगें जल्द पूरी
नहीं की गईं तो तीन मार्च को अधिवक्ता कार्य बहिष्कार कर मुख्यमंत्री का
पुतला फूकेंगे।
सिविल बार एसोसिएशन तथा कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन के
अधिवक्ता शुक्रवार को लामबंद होकर अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर चले गए।
इसकी वजह से न्यायिक कार्य ठप रहा। इस दौरान आयोजित सभा में वकीलों ने कहा
कि अधिवक्ताओं की गंभीर बीमारी के इलाज के लिए शासन द्वारा समुचित धनराशि
मुहैया कराई जाए। शासन द्वारा प्रतिवर्ष अवमुक्त किए जाने वाले 40 करोड़
रुपये का उपयोग अधिवक्ता हित में करते हुए बीमा की धनराशि पांच लाख रुपये
की जाए।
यही नहीं बार कौंसिल के अध्यक्ष को न्यासी समिति का सदस्य/
महाधिवक्ता की अनुपस्थिति में समिति को निर्णय लेने का अधिकार दिया जाए।
पांच लाख मृतक बीमा योजना जो न्यासी समिति द्वारा अनुमोदित किया जा चुका
है, उसे तत्काल लागू किया जाए। तीन वर्ष तक के युवा अधिवक्ताओं को घोषित
स्टाइपेंड योजना को भी लागू किया जाना चाहिए। कहा कि जीवन बीमा के लिए आयु
65 वर्ष निर्धारित की जाए।
साथ्ाथ ही 65 वर्ष की आयु के अधिवक्तागण जो
स्वेच्छा से विधि व्यवसाय से विरत रहना चाहते हैं, उन्हें 10 हजार रुपये
मासिक पेंशन दिया जाए। चेतावनी दी कि यदि मांगें पूरी नहीं की गई तो
अधिवक्ता तीन मार्च को प्रदेश सरकार का पुतला दहन करेंगे। इस मौके पर
कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष चिरायु प्रसाद श्रीवास्तव, महासचिव
शशिकांत सिंह यादव, सिविल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष ओमप्रकाश वर्मा सहित
अन्य अधिवक्ता मौजूद थे।
टैक्स बार के अधिवक्ता भी रहे हड़ताल पर
उत्तर प्रदेश बार काउंसिल के आह्वान पर उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से
अधिवक्ता कल्याणकारी योजनाओं को लागू न करने एवं अधिवक्ता कल्याण निधि की
धनराशि में वृद्धि न करने के विरोध में गाजीपुर टैक्स बार एसोसिएशन के
अधिवक्ता शुक्रवार को हड़ताल पर रहे। न्यायिक कार्य से विरत रहे अधिवक्ताओं
ने प्रदेश सरकार को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी से माध्यम से भेजने का
निर्णय लिया। इस मौके पर अधिवक्ताओं ने चेतावनी दिया कि अगर मांगों पर
सरकार ने सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता है तो 3 मार्च को सभी अधिवक्ता
हड़ताल कर पुतला दहन करेंगे।
है।