वर्तमान समय में दोनों इंजेक्शन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध, जो चिकित्सकों के परामर्श के मुताबिक मरीजों को वहां के स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा लगाया जाता है। मेडिकल कॉलेज अस्पताल के सीएमएस डॉ. राजेश सिंह ने बताया कि एक माह में 2500 से 2700 मरीज रेबीज इंजेक्शन लगाने आते हैं।
रोज नए मरीजों की संख्या 30 से 40 के बीच होती है। जिले के 19 पीएचसी और 59 न्यू पीएचसी पर प्रतिमाह एंटी रेबीज के 3000 वॉयल की खपत होती है। एक वॉयल में चार लोगों को इंजेक्शन लगता है। करीब 12 हजार लोगों को प्रतिमाह एंटी रेबीज इंजेक्शन लग रहा है। इसमें कुत्ता और बंदर के हमले से घायल मरीज शामिल हैं।
दो हजार से अधिक मूल्य का है एंटी सिरम रेबीज- एंटी सिरम रेबीज बाजार में काफी महंगा मिलता है। चीफ फार्मासिस्ट बुद्धी प्रसाद ने बताया कि यह इंजेक्शन बाजार में करीब 2175 रुपये का एक वॉयल मिलता है। यह इंजेक्शन कुत्तों के हमले से गंभीर रूप से घायल मरीज को लगाया जाता है।
ग्रामीण इलाकों में अधिक होते हैं घायल
शहर की अपेक्षा ग्रामीण इलाकों में अधिक लोग कुत्ते के हमले से घायल होते हैं। यहीं वजह है कि सीएचसी, पीएचसी और न्यूपीएचसी पर रेबीज के इंजेक्शन के लिए अधिक मरीज पहुंचते हैं। यहीं नहीं शहर से सटे आस-पास के लोग भी रेबीज का इंजेक्शन लगवाने मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचते हैं। इसमें कुत्तों के अलावा बंदरों के हमले के भी मरीज शामिल होते हैं।
जल्द ही निकलेगा टेंडर,पकड़े जाएंगे कुत्ते
नगर पालिका परिषद के ईओ धीरेंद्र कुमार ने बताया कि जल्द ही टेंडर निकलेगा। इसे लेकर कार्रवाई चल रही है। सड़कों एवं मोहल्लों में घुम रहे कुत्तों को पकड़ने का काम होगा। इसके बाद ही ऐसे कुत्तों की नसबंदी भी होगी। इसके लिए नपा प्रशासन की ओर से ठोस कदम उठाया जा रहा है। एक माह में यह प्रक्रिया पूर्ण कर कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।