बारा। यूपी-बिहार को जोड़ने वाले नेशनल हाईवे 124-सी किनारे स्थित सूखे पेड़ हादसों को दावत दे रहे हैं। तमाम ऐसे पेड़ हैं, जो पुराने हो गए हैं और कभी भी गिर सकते हैं।
वन विभाग की ओर से इन पेड़ों का छपान (टैगिंग) भी किया गया है, जिससे यह पता चलता है कि यह पेड़ कभी भी ढह सकते हैं, लेकिन यह काटे नहीं जा सके हैं। वन विभाग के अनुसार सूखे पेड़ों को चिह्नित कर काटने के लिए वन निगम को रिपोर्ट दी गई है। जमानिया वन रेंज में वन परिक्षेत्र शून्य है। वन विभाग की जिम्मेदारी हरे पेड़ों की देखभाल, जंगली एवं खतरनाक पशुओं का रेस्क्यू और हर वर्ष होने वाले वृहद पौधरोपण अभियान के लिए पौधों की नर्सरी तैयार करना है। क्षेत्र में हरे पेड़ों की कटाई को लेकर तो समय-समय पर सवाल उठते रहते हैं। सूखे पेड़ों की जिम्मेदारी भी वन विभाग के पास रहती है। खासकर सड़क के किनारे ऐसे सूखे पेड़ जो कभी भी हादसे का कारण बन सकते हैं। वन विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक वन विभाग सूखे पेड़ की छपान का कार्य करता है। इसके बाद इसकी सूचना वन निगम गाजीपुर को भेज देता है। वन विभाग के पास पेड़ काटने का अधिकार नहीं है। विभाग सड़क किनारे सूखे पेड़ पर लोहे के एक प्लेट से टैगिंग करता है, जिससे पता चल सके कि यह पेड़ वन विभाग के अधिकृत है। वन विभाग के अनुसार वर्ष 2019-20 में अब तक 73 सूखे पेड़ों की टैगिंग की गई है, लेकिन अगर असल में देखें तो नेशनल हाईवे 124-सी से लेकर जमानिया तक लगभग 200 से अधिक सूखे पेड़ सड़कों के किनारे खड़े हैं।
विभिन्न मार्गों पर सूखे पेड़ों की छपान करके इसकी सूचना वन निगम कार्यालय गाजीपुर भेज दी जाती है। पेड़ कटवाने का अधिकार उन्हें ही है।- अशोक सिंह यादव, उप क्षेत्रीय वनाधिकारी