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डाला छठ: भगवान भाष्कर के उगते ही बही दूध की धार

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गाजीपुर। शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में उपासना के पर्व डाला छठ पर उगते सूर्य को अर्घ्य दिया गया। छठ पूजा के दौरान विभिन्न गंगा घाटों और गंगा पार का दृश्य देखते ही बन रहा था। ऐसा लग रहा था कि मानो आसमान से जमीं पर सितारे उतर आए हों। जिधर भी लोगों की नजर जा रही थी। उधर दर्जनों की संख्या में दीपों की जगमगाती रोशनी दिखाई दे रही थी। वहीं गंगा में तैर रहे जलते दीप पानी की रोशनी में अलग छटा बिखेर रहे थे। रात तीन बजे के बाद से ही नगर के ददरीघाट, कलेक्टर घाट, सिकंदरपुर, अंजही घाट, नवापुरा घाट, पत्थर घाट, स्टीमर घाट, पोस्ता घाट सहित अन्य घाटों के लिए व्रती महिलाओं तथा उनके परिजनों के घरों से निकलने का क्रम शुरू हो गया था। सुबह के पांच बजते-बजते शहर के प्राय: सभी गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा।
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घाटों पर पहुंची व्रती महिलाओं ने वेदी को गंगा जल से धोया। गन्ने को वेदी के पास खड़ा करने के बाद दीपों में घी और बाती सजाकर उसे प्रज्जवलित कर पूजन-अर्चन शुरू किया। सूर्योदय से कुछ ही पहले व्रती महिलाएं पानी में सूप लेकर खड़ी हो गई। सभी की नजरें सूर्यदेव की तरफ थी। जैसे ही भगवान भाष्कर ने आंखें खोली श्रद्धालु उनका जयघोष करने लगे। इसके बाद दूध का अर्घ्य देने का कार्यक्रम शुरू हुआ। पुत्र एवं परिवार के अन्य सदस्यों सहित घाटों पर मौजूद लोगों ने व्रती महिलाओं को अर्घ्य दिया। झुंड एवं समूह में मौजूद महिलाओं की ओर से गाए जाने वाले छठ मइया के गीत से पूरा वातावरण गुंजायमान रहा। कई गंगा घाटों पर समाजसेवियों द्वारा भक्तों के लिए चाय, अर्घ्य देने के नि:शुल्क दूध एवं कोविड संक्रमण को देखते हुए कहीं-कहीं मास्क का वितरण किया गया।
मुहम्मदाबाद: सूर्योदय होते ही अर्घ्य देकर डाला छठ का तीन दिवसीय महापर्व समाप्त हो गया। व्रती महिलाओं ने अपने पति और पुत्र की सलामती के लिए निर्जल व्रत रखकर भगवान भास्कर को कल शाम और आज सुबह अर्घ्य देने के बाद व्रत का समापन किया। इस दौरान गंगा तट और पोखरों पर काफी भीड़ रही। नगर के सोमेश्वर महादेव के मंदिर के पास स्थित पोखरा, सीताराम का पोखरा, हनुमानगंज पोखरा, मलिकपुरा छोटका पोखरा के अलावा बच्छलकापुरा, सेमरा, शेरपुर, गौसपुर गंगा तट, मगई नदी के किनारे छठ पूजा हुई।
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