अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम चंद्रगुप्त की अदालत ने बुधवार को कासिमाबाद थाना क्षेत्र में एक वर्ष पूर्व हुए दहेज हत्या के मामले में पति सहित तीन अभियुक्तों को उम्र कैद और दस-दस हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड न देने पर एक-एक वर्ष के अतिरिक्त कारावास का आदेश अदालत ने दिया।
बिरनो थाने के बिहरा निवासी रामनारायण राम की पुत्री मीरा की शादी वर्ष 2009 में लक्ष्मण राम पुत्र फेंकू राम निवासी इंदौर थाना कासिमाबाद के साथ हुई थी। शादी के एक माह तक मीरा के ससुराल वाले ठीक रहे। इसके बाद जब वह दूसरी बार ससुराल आई तो देहज में मोटर साइकल और दस हजार रूपये की मांग करने के साथ मारपीट करने लगे। इसकी सूचना मीरा ने इसकी सूचना अपने पिता को दी। पिता ने कासिमाबाद थाने में प्रार्थना पत्र दिया। 2 मई वर्ष 2012 को दोनों पक्षों में सुलह-समझौता हो गया।
इसके बाद भी ससुराल वाले मीरा को प्रताड़ित करते रहे। ससुराल वालों ने 21 जून वर्ष 2015 मीरा को मार-पीटकर मिट्टी तेल डालकर जला दिया। तीन दिन बाद मीरा के पिता के पिता को घटना की जब जानकारी हुई तो वह अपनी पुत्री को देखने के लिए सदर अस्पताल पहुंचे। मीरा का इलाज के दौरान पांच जुलाई वर्ष 2015 को मृत्यु हो गई। पिता की तहरीर पर कासिमाबाद थाने में धारा 498 ए, 323, 326, 504 भादवी एवं डीपी एक्ट के तहत ससुर फेंकू राम , पति लक्षमण , सास कलावती और देवर लखंदरराम के विरुद्ध केस दर्ज हुआ। विवाहिता की मृत्यु के बाद धारा की बढ़ोत्तरी करते हुए आरोप पत्र कोर्ट में भेजा गया।
विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक शासकीय अधिवक्ता प्रदीप चतुर्वेदी ने नौ गवाह पेश किए। अदालत ने अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष की तर्कों को सुनने के बाद अदालत ने ससुर फेंकू राम के विरुद्घ आरोप साबित न होने के कारण उन्हें दोष मुक्त कर दिया। जबकि पति, सास और देवर को दोषि पाते हुए दहेज हत्या के लिए उपरोक्त सजा सुनाई।