जखनिया(गाजीपुर)। देश के दूसरे सर्वोच्च सैन्य सम्मान महावीर चक्र से सम्मानित शहीद रामउग्रह पांडेय की नेत्रहीन पुत्री अपने पट्टीदारों से परेशान होकर फरियाद लेकर रविवार को भुड़कुड़ा कोतवाली पहुंची। कोतवाल ने फरियादी की बात सुनने के बजाए उसके पुत्र को लॉकअप में बंद कर दिया। जब इसकी जानकारी सैन्य अधिकारियों को हुई तो उन्होंने कोतवाल से बात की। कोतवाल ने शहीद के नाती को दो घंटे बाद लॉकअप से छोड़ दिया।
महावीर चक्र विजेता शहीद रामउग्रह पांडेय की नेत्रहीन पुत्री सुनीता देवी का अपने पट्टीदारों से जमीन को लेकर विवाद चल रहा है। इस मामले में भुड़कुड़ा कोतवाल की ओर से करीब एक सप्ताह पूर्व पंचायत बैठा कर मामले का हल निकाला गया। कागजात के आधार पर सुनीता देवी को उक्त जमीन का मालिक बताया गया लेकिन पट्टीदारों द्वारा बाद में इस निर्णय से इनकार करते हुए शनिवार को पुन: विवाद किया गया। सुबह नेत्रहीन सुनीता अपने पुत्र शिवम उर्फ कर्मवीर के साथ फरियाद लेकर भुड़कुड़ा कोतवाली में पहुंची जहां पहले से दूसरा पक्ष भी उपस्थित था। मामला सुनने के बजाए भुड़कुड़ा कोतवाल ने कुछ ही देर में नेत्रहीन मां के साथ आए शिवम उर्फ कर्मवीर को और दूसरे पक्ष से एक व्यक्ति को थाने में बंद कर दिया। इस संबंध में कोतवाल बृजेश यादव ने बताया कि दोनों पक्षों में सुलह समझौते के बाद दोनों पक्षों के लोगों को छोड़ दिया गया।