मुहम्मदाबाद। स्थानीय विकास खंड के करमचंदपुर गांव में रविवार को छह थानों की फोर्स के साथ पहुंची जांच टीम ने सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के जखनिया विधायक एवं करमचंदपुर के पूर्व ग्राम प्रधान त्रिवेणी राम के खिलाफ उनके ग्राम प्रधानी के कार्यकाल के दौरान कथित तौर पर किए गए 56 लाख रुपये के घोटाले की जांच की।
त्रिवेणी राम मुहम्मदाबाद विकासखंड के करमचंदपुर गांव के प्रधान रहे हैं। उनके प्रधानी काल में बिना काम कराए पैसा उतार कर लगभग 56 लाख रुपये का घोटाला किए जाने का मामला काफी पुराना है। गांव के लोगों की ओर से त्रिवेणी राम द्वारा किए गए घोटाले की शिकायत पर पिछले कई वर्षों से जांच कराई जा रही है। इसके लिए कई बार टीम गठित कर जांच शुरू हुई। किसी न किसी वजह से जांच विवाद में रहा। इसी बीच वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में त्रिवेणी राम सुभासपा के टिकट पर जखनिया विधानसभा से विधायक निर्वाचित हो गए। प्रदेश सरकार में सुभासपा के शामिल रहने के कारण कोई भी अधिकारी विधायक के खिलाफ जाने से हिचकता रहा। सुभासपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं प्रदेश सरकार में मंत्री ओमप्रकाश राजभर और पूर्व जिलाधिकारी संजय खत्री के बीच ठनी जंग में करमचंदपुर गांव की जांच का मुद्दा भी शामिल रहा। विधायक के विरुद्ध कोई कार्रवाई न होने और प्रदेश सरकार में सुभासपा की भागीदारी से न्याय न मिलता देख कर शिकायतकर्ता राजीव रंजन सिंह ने हाईकोर्ट की शरण ली। हाईकोर्ट ने जिलाधिकारी गाजीपुर को दो माह में विधायक के खिलाफ जांच कर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया था। इसी क्रम में प्रशासन ने परियोजना अधिकारी विजय प्रकाश वर्मा के नेतृत्व में तीन सदस्यीय जांच कमेटी नियुक्त कर दी। जांच टीम ने गांव में जाकर शिकायतों का स्थलीय निरीक्षण किया। गांव के लोगों का बयान दर्ज किया। शिकायतकर्ता राजीव रंजन सिंह एवं गांव के अन्य लोगों ने अपना बयान जांच टीम के सामने दिया। उन्होंने कहा कि त्रिवेणी राम के ग्राम प्रधानी कार्यकाल में लगभग 56 लाख रुपये के सरकारी धन की बंदरबांट की गई। पूर्व में जिला विकास अधिकारी सुरेशचंद्र राय के नेतृत्व में गठित जांच टीम ने अपनी जांच रिपोर्ट में ग्राम प्रधान त्रिवेणी राम एवं तत्कालीन ग्राम पंचायत सचिव लालजी राम द्वारा बिना काम कराए लगभग 2200 बोरी सीमेंट, 1800 ट्राली राबिश, लगभग 1700 ट्रालाी मिट्टी आदि का भुगतान दिखाकर गबन किया। जांच अधिकारी ने 5606588 रुपये गड़बड़ी मानते हुए इसे वसूली योग्य धनराशि बताई थी। उसके बाद पुन: हाईकोर्ट के आदेश पर जांच कराई जा रही है। जांच टीम ने सभी अभिलेखों को देखा एवं लोगों के बयान दर्ज किए। जांच के समय जांच टीम के सदस्य परियोजना निदेशक विजय प्रकाश वर्मा, डीआरडीए के सहायक अभियंता जयप्रकाश मिश्रा एवं ग्रामीण अभियंत्रण के अवर अभियंता रामनाथ ठाकुर के अलावा उपजिलाधिकारी रमेश यादव, क्षेत्राधिकारी महिमा पाठक, विधायक त्रिवेणी राम, राजीव कुमार सिंह, कोतवाल विमल कुमार मिश्रा, ग्राम पंचायत अधिकारी रवि यादव, टीए अजय सिंह के अलावा बड़ी संख्या में मोहम्मदाबाद, मनहरा, कासिमाबाद, भावरकोल, बडे़सर और महिला थाना की पुलिस फोर्स एवं गांव के लोग उपस्थित रहे।