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बंदी रक्षकों की भूमिका की होगी जांच : जेलर

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गाजीपुर। जिला कारागार में डीएम और एसपी की छापेमारी के बाद सख्ती बढ़ गई है। जेल के बैरक नंबर तीन से बरामद मोबाइल और चाकू के बाद आला अफसरों ने शासन को इसकी रिपोर्ट भेज दी है। उधर जेलर ने भी बंदीरक्षकों की भूमिका की गोपनीय जांच शुरू कर दी है। जेलर के कड़े कदम से सभी डरे-सहमे हुए हैं। पिछले दो दिनों से जेल पर पहरा कड़ा हो गया है।
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जिला कारागार में मोबाइल, चाकू, ब्लेड, बाहर से भोजन के साथ ही बीड़ी, सीगरेट और खैनी तक बंदियों को मुहैया कराया जाता है। यह सिलसिला सालों से चला आ रहा है। इसी का नतीजा रहा कि बीते 20 जनवरी 2017 को डीएम संजय खत्री तथा तत्कालीन एसपी अरविंद सेन की छापेमारी में 35 मोबाइल एवं अन्य प्रतिबंधित सामान बरामद किए गए थे। जिला कारागार से भारी संख्या में मोबाइल आदि मिलने की सूचना शासन को मिलते ही यहां तैनात अधिकारी और कर्मचारियों का स्थानांतरण तक हुआ था। कई दबंग बंदियों को भी यहां से दूसरी जेलों में भेजा गया था। कुछ महीने तक पूरी सख्ती रही। सबकुछ ठीक-ठाक चला। लेकिन फिर जिला कारागार अपने पुराने डर्रे पर आ गया है। पुन: जेल में मोबाइल पहुंच गई। बैरकों में रहने वाले बंदियों को अंदर से बात करने की छूट दे दी गई। बाहर से खाने-पीने के सामान के साथ ही चाकू तक जेल के अंदर पहुंच गया। इसकी सूचना आला अफसरों को मिलते ही बुधवार को गोपनीय तरीके से डीएम तथा एसपी जिला कारागार में धमक गए। एक-एक बैरकों की तलाशी ली। इस दौरान तीन मोबाइल तथा दो चाकू सहित अन्य प्रतिबंधित सामान बरामद किया। प्रभारी जेलर विनय सिंह ने बताया कि जेल के बैरक तक मोबाइल तथा चाकू कैसे पहुंचा ? इसके लिए जिम्मेदार कौन है ? अन्य प्रतिबंधित सामान कैसे जेल के अंदर तक आ रहा है, इसकी जांच होगी। बंदी रक्षकों के भी भूमिका की जांच कराई जाएगी और जो भी दोषी पाया जाएगा उसके विरुद्ध कठोर कार्रवाई होगी।
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