गाजीपुर। बागपत जेल में गोली मार कर माफिया डान प्रेमप्रकाश उर्फ मुन्ना बजरंगी की सोमवार को हत्या कर दी गई। मुन्ना बजरंगी मुहम्मदाबाद विधायक कृष्णानंद राय हत्याकांड के बाद सुर्खियों में आया था। उसकी हत्या की खबर मिलते ही लोगों के दिलो दिमाग में कृष्णानंद राय हत्याकांड की याद एक बार फिर ताजा हो गई। समाचार देखने के लिए लोग टीवी से चिपक गए। सुबह से देर शाम तक यह सिलसिला बदस्तूर जारी रहा। प्रत्येक चट्टी-चौराहे पर भी मुन्ना बजरंगी की हत्या की चर्चा होती रही।
मुहम्मदाबाद के विधायक कृष्णानंद राय को बीते 29 नवंबर 2005 को अपने छह साथियों के साथ क्रिकेट मैच का उद्घाटन करने के लिए बोलेरो से गोड़ऊर गए थे। इसी बीच दिन में करीब तीन बजे भांवरकोल थाने के बसनिया चट्टी पर बदमाशों ने उनके वाहन को घेर लिया और स्वचालित हथियारों से ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दी थी। गोलियों की बौछार से विधायक कृष्णानंद राय सहित सात लोगों की बोलेरो में ही मौत हो गई थी। घटना को अंजाम देने के बाद बदमाश फरार हो गए थे। इस मामले में मृत विधायक के भाई राजनारायण राय ने मुन्ना बजरंगी, अताउर रहमान उर्फ बाबू, फिरदौसखान तथा साजिशकर्ता में विधायक मोख्तार अंसारी, सांसद अफजाल अंसारी, मुख्तार के बहनोई एजाजुल हक अंसारी सहित कुल सात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराया था। एक दिसंबर 2005 को आरोपी एजाजुल अंसारी ने न्यायालय में आत्म समर्पण कर दिया था। जिले के जिन लोगों को भी बागपत जेल में मुन्ना बजरंगी की हत्या की जानकारी हुई, वह समाचार देखने के लिए टीवी से चिपक गए और पूरे दिन कृष्णानंद राय की हत्याकांड की चर्चा करते देखे गए।