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कोरोना : जिले में 1400 कुंतल दूध की खपत रुकी

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गाजीपुर। देश और प्रदेश के साथ जनपद भी कोरोना से जंग लड़ रहा है। लॉकडाउन के दूसरे चरण में भी मिठाई की दुकानें बंद होने से खास लोगों के यहां भी मिठाई खोजे नहीं मिल रही है। जनपद की खास पहचान रखने वाली लौकी की बरफी, खीर मोहन, रसमाधुरी, सैदपुर का स्पंज और रसगुल्ला लोगों के लिए सपना हो गया हैं। दूध की खपत को लेकर किसान और पशुपालक परेशान हैं। देखा जाए तो 60 फीसदी दूध, खोआ और पनीर की खपत मिठाई की दुकानों पर की जाती है। लेकिन दुकानें बंद होने से किसान और पशुपालक मारे-मारे फिर रहे हैं। बड़े पशुपालक इस समस्या से उबरने के लिए फोन से बुकिंग करने के बाद घर-घर जाकर दूध, खोआ और पनीर पहुंचा रहे हैं।
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जिला अभीहित अधिकारी अजीत कुमार मिश्रा की माने तो शहर और ग्रामीण इलाकों में संचालित होने वाली मिठाई की दुकानों की संख्या लगभग 780 है। वर्तमान में सभी दुकानें पूरी तरह बंद हैं। इन मिठाई दुकानों पर प्रतिदिन 1400 कुंतल से अधिक दूध की खपत होती है। लॉकडाउन की वजह से दूध की बिक्री पूरी तरह ठप है। पशुपालक दूध को औने-पौने दाम में बेच रहे हैं। वर्तमान समय में दूध की खपत न होने पर दूध का पनीर और खोआ तैयार किया जा रहा है। इसे किसी तरह लोगों तक पहुंचाकर दुधारू पशुओं के लिए भूसा, खरी और चारे की व्यवस्था की जा रही है।
वर्तमान में दूध का दाम काफी कम है। हर साल गर्मी के दिनों में दूध की चारों तरफ कमी रहती थी। लोग दूध ऊंचे दामों पर खरीदने के लिए मजबूर होते थे। ऐसा पहली बार देखने को मिल रहा है कि सुबह से दोपहर तक दूधिए दूध बेचने के लिए लोगों का इंतजार कर रहे हैं। किसी-किसी दिन दूध न बिकने और गर्मी में फटने की वजह से फेंकना पड़ रहा है। ऐसे में ग्रामीण इलाके में पशुपालक दूध से पनीर और खोआ तैयार कर किसी तरह क्षेत्र में बेच रहे हैं। इनका कहना है कि हमारा 60 फीसदी दूध मिठाई की दुुकानों पर बिकता है। अब दुकानें बंद होने से परेशानी बढ़ गई है। लॉकडाउन समाप्त होने के बाद ही हालत में सुधार होगा। शहर की प्रसिद्ध मिठाई की दुकानों के बंद होने से दूध की खपत रुक गई है।
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