दिलदारनगर/ सुहवल। नूरपुर कांड में पुलिस की बर्बरता जांच में सामने आने और पीड़ितों की पिटाई की पुष्टि मेडिकल रिपोर्ट में होने के बाद भी फौजी परिवार की तहरीर पर अभी तक दोषियों के विरूद्ध एफआईआर दर्ज नहीं किया गया है। इतना ही नहीं पीड़ितों ने कुछ दिन पूर्व निलंबित पुलिस कर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की गुहार पुलिस अधीक्षक डा. ओमप्रकाश सिंह से की थी। बावजूद अभी तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। ऐसे में उच्चाधिकारियों की ओर से न्याय न मिलता देख, पीड़ित फौजी परिवार अब न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकते हैं। इसकी योजना तैयार की जा चुकी है।
पीड़ित फौजी परिवार की माने तो दोषी पुलिस कर्मियों के विरूद्ध केस दर्ज कराने की गुहार थाने, सीओ और एसपी तक कर चुके हैं। उनकी कोई सुनने को तैयार नहीं हैं। अब उनके पास कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है। वह थक हार कर कोर्ट की शरण लेंगे। उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। जल्द दोषी पुलिस कर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के लिए न्यायालय की आवेदन दिया जाएगा। ताकि उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज हो और उन्हें सजा मिल सके। उन्होंने बताया कि मेडिकल रिपोर्ट में जब शरीर पर पड़े जख्म से पिटाई की पुष्टि हो गई। इसके बाद भी तहरीर पर निलंबित पांच पुलिस कर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं किया जा रहा है। अब भी पुलिस विभाग के अफसर उन्हें बचाने में लगे हैं। बीते 30 जुलाई को डाक द्वारा एसपी को पत्र भेजकर पूरी घटना की जानकारी देते हुए दोषी पुलिस कर्मियों खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई थी। करीब दस दिन बीत गए, लेकिन आज तक उनके द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। ऐसे में अब न्याय की आस अधिकारियों के ऊपर से भरोसा उठ चुका है। ऐसे में अब सिर्फ न्यायालय में ही न्याय मिल सकता है। दोषी पुलिस कर्मियों के खिलाफ अब न्यायालय की शरण लेने की तैयारी शुरू कर दी गई है।