जिले के ग्रामीण इलाकाें में स्थापित सीएचसी-पीएचसी के वार्डों में लगे बेडों की स्थिति खराब होने के साथ फटे बेड और गंदी चादरों के मामले को सीएमओ ने गंभीरता से लिया है। टीम गठित कर जांच बैठाने के साथ ही अधीक्षकों से रिपोर्ट मांगी है। साथ ही पूछा है कि बजट के बावजूद गंदी चादरें क्यों बिछाई जा रही हैं और बेड की उपलब्धता के बाद भी खराब बेड वार्डों में क्यों लगाए जा रहे हैं। अमर उजाला ने फटे बेड और गंदी चादरों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था। इसे संज्ञान लेकर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने कार्रवाई शुरू कर दी है।
शहर एवं ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों को बेहतर चिकित्सकीय सुविधा देने के लिए सीएचसी, पीएचसी, न्यू पीएचसी, स्वास्थ्य उपकेंद्र और आरोग्य केंद्रों को स्थापित कराया गया है। जबकि हकीकत यह है कि यहां मरीजों के भर्ती होने पर चिकित्सकीय सुविधा न के बराबर बनी रहती है। इस मामले को अमर उजाला ने बीते छह मार्च को पेज नंबर दो पर मरीजों को मिल रही हैं गंदी चादरें और फटे बेड शीर्षक के साथ खबर प्रमुखता से प्रकाशित किया था। खबर का संज्ञान लेकर सीएमओ ने पूरे मामले की जांच करने के लिए टीम गठित करने के साथ ही रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है। साथ ही अधीक्षकों से आख्या मांगी है। इससे अधीक्षक और जिम्मेदारों में हड़कंप की स्थिति बनी है। ओपीडी में मरीजों को देखने का आंकड़ा कम होने पर भी नाराजगी जताते हुए सुधार की चेतावनी दी है। सीएमओ डाॅ. एसके पांडेय ने बताया कि फटे बेड और गंदे चादर की जांच के लिए टीम गठित कर दी गई है। अधीक्षकों से आख्या रिपोर्ट भी मांगी गई है। इसमें लापरवाह मिले कर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई तय है।