गाजीपुर। जिले में मानक विहीन और फिटनेस फेल करीब 300 स्कूल वाहन लगातार सड़कों पर फर्राटा भर रहे हैं। ऐसे में मासूमों के जीवन से खिलवाड़ किया जा रहा है। आलम यह है कि हर तीसरे स्कूल वाहन में खतरे का सफर कराया जा रहा है। परिवहन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जिले में करीब 1113 स्कूली वाहन पंजीकृत है। इनमें 300 स्कूली वाहन चिह्नित किए गए हैं, जो बिना फिटनेस प्रमाण पत्र के संचालित हो रहे हैं। इसके अतिरिक्त तमाम ऐसे वाहन भी जांच में सामने आए हैं, जो स्कूलों में संबंद्ध हैं और उनके कागज अधूरे हैं। साथ ही टेंपो, ई-रिक्शा में बैठकर बच्चे पढ़ने के लिए स्कूल जाते हैं। ऐसे में इन वाहनों में बच्चों को स्कूल भेजना जोखिम भरा है। निजी स्कूल संचालक बिना फिटनेस कराए ही बच्चों को वाहनों से लाने ले जाने का काम कर रहे हैं।
इन बिंदुओं की होती है जांच-वाहन की स्थिति, रेडियम पट्टी, इंजन की आवाज,हेडलाइट, बैक लाइट, इंडीकेटर, फॉग लाइट वाहनों के ब्रेक लगाने के सिस्टम, स्टेयरिंग, वाहन का कलर, इंजन व चेसिस नंबर
ये भी हैं मानक-बस पर स्कूल का नाम, फोन नंबर लिखा होना चाहिए।
स्कूल बसों की अधिकतम अवधि 15 वर्ष है।
स्कूल बस में छात्रों की सूची, नाम, पता, कक्षा, ब्लड ग्रुप और रूट नंबर लिखा होना चाहिए।
बस में चालक के अलावा अनुभवी पुरुष या महिला सहायक तैनात होने चाहिए।
बस का रंग पीला होना चाहिए।
सीटिंग क्षमता अनुसार प्रत्येक बस में अग्निशमन यंत्र होने चाहिए।
बस की बॉडी स्टील की और पूरी तरह बंद हो।
बस में कैनवास की छत न हो।
सीएनजी वाहनों की तिमाही चेकिंग अधिकृत केंद्र से कराई जाए।
प्रेशर हॉर्न प्रतिबंधित है।
वाहन में प्राथमिक उपचार के लिए किट की व्यवस्था होनी चाहिए।