जिले के ग्रामीण इलाकों में स्थापित सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर प्रतिमाह चार हजार के आसपास सामान्य और सिजेरियन प्रसव होता है। इन्हें नाश्ता और भोजन तो दूर एक कप चाय तक के लिए प्रसूताओं और गर्भवती महिलाओं को तरसना पड़ता है। जबकि शासन प्रति मरीज 90 रुपये का भुगतान करता है।
कहीं दवा तो कहीं चढ़ाने के लिए पानी मरीजों को बाहर के निजी मेडिकल स्टोरों से खरीदना पड़ता है। गांवों में रहने वाली महिलाओं को बेहतर चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध कराने के साथ प्रत्येक माह उनके स्वास्थ्य की जांच और मातृ-शिशु दर को कम करने के लिए शासन से कई महत्वपूर्ण योजनाओं का संचालन किया जा रहा है।
प्रसव के लिए भर्ती गर्भवती महिलाओं और प्रसूताओं को अस्पतालों में सुबह नाश्ता, दोपहर में खाना और शाम की चाय के साथ रात में भोजन की भी व्यवस्था है लेकिन 11 सीएचसी और पांच पीएचसी से यह व्यवस्था नदारद है।
जबकि विभाग ई-टेंडरिंग द्वारा पांच सेवा प्रदाताओं में इन्हें बांटने का दावा करता है। हकीकत यह है कि यहां भर्ती महिला मरीजों को कुछ नहीं मिलता।
तीमारदारों को दवा और पानी चढ़ाने तक के लिए बाहर निजी मेडिकल स्टोरों की दौड़ लगानी पड़ती है।
प्रसूता बिंदु यादव ने कहा कि सैदपुर सीएचसी पर 27 फरवरी को भर्ती हुई थी। सामान्य प्रसव से पुत्री पैदा हुई है। चाय तक नहीं मिली। दवा भी बाहर से ही मंगानी पड़ रही है।