जिले के को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों में अब हर महीने चहक कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। इसका उद्देश्य बच्चों को खेल-खेल में शिक्षा और सामान्य जानकारी देना है।
इस कार्यक्रम के तहत बच्चों को खिलौने, अंक और अक्षर सिखाने वाली सामग्री और किट प्रदान की जाएगी ताकि वह प्राथमिक कक्षाओं में प्रवेश से पहले बुनियादी ज्ञान हासिल कर सकें। इस कार्यक्रम के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित भी किया गया है।
जिले में 4127 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं जिनमें 997 को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्र परिषदीय विद्यालयों के परिसर में संचालित हैं। इन विद्यालयों में हर माह माता उन्मुखीकरण कार्यक्रम आयोजित किया जाता है।
माता उन्मुखीकरण कार्यक्रम के बाद एक घंटे चहक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी उपासना रानी वर्मा ने बताया कि शासन की ओर से जारी चहक कार्यक्रम की गाइड लाइन में बताया गया है कि तीन माह का स्कूल रेडीनेस कार्यक्रम सिर्फ उन बच्चों के लिए तैयार किया गया है जो अगले वर्ष कक्षा एक में प्रवेश पाने वाले हैं। प्रवेश से पहले वह इस समय आंगनबाड़ी केंद्रों की बाल वाटिका में पंजीकृत हैं।
कक्षा एक के लिए उन्हें तैयार करने के लिए एक विशेष कार्यक्रम चहक चलाया जाएगा। इसमें शिक्षण सामग्री के अलावा खेल-खेल में बच्चों को प्रारंभिक साक्षरता और गणितीय बोध कराया जाएगा। बच्चों को खेल-खेल में सिखाने के लिए प्रतिदिन गतिविधियों को संचालित किया जाएगा।
इसमें प्रतिदिन प्रार्थना, बालगीत के अलावा अपने आसपास के जानवरों की आवाज को निकालना, तोड़-मोड़कर कागज की गेंद बनाना, हथेली से नापकर बड़ी एवं छोटी वस्तुओं के नाम बताना, ध्वनि पहचानना, मुक्त चित्रकारी आदि खेल शामिल हैं। उन्होंने बताया कि इनकी मदद से बच्चों में सीखने की ललक के साथ गणित का बोध भी कराने का प्रयास किया जाएगा।