गाजीपुर। 27 नवंबर की रात 12.22 बजे नंदगंज थाने में अपहरण, रंगदारी सहित कई संगीन आरोपों में चंदौली के तत्कालीन एसपी समेत 18 पुलिस कर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। यह मुकदमा मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट स्वप्न आनंद की अदालत के आदेश पर दर्ज किया गया है। मामला वर्ष 2021 का है। नंदगंज थानाध्यक्ष कमलेश कुमार ने मुकदमा दर्ज होने की पुष्टि की है। वाराणसी के शिवशंकर नगर कॉलोनी, भुल्लनपुर थाना मंडुवाडीह निवासी और चंदौली जिले में तैनात कांस्टेबल अनिल सिंह ने 2021 में तत्कालीन एसपी अमित कुमार द्वितीय समेत 18 पुलिसकर्मियों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था। तहरीर में कहा है कि एसपी चंदौली अमित कुमार द्वितीय, प्रभारी निरीक्षक मुगलसराय शिवानंद मिश्रा द्वारा अपने पद का दुरुपयोग कर मुगलसराय थाने में 12.50 लाख रुपये प्रतिमाह जनता से नियम विरुद्ध वसूली की जा रही थी। वसूली सूची को कांस्टेबल अनिल सिंह ने सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया था। बाद में इस मामले की जांच डीआईजी विजिलेंस लव कुमार ने की थी। जांच में भ्रष्टाचार उजागर हुआ था। आरोप है कि इस पर एसपी ने 28 फरवरी 2021 को कांस्टेबल अनिल सिंह को बर्खास्त कर दिया था। एसपी और इंस्पेक्टर ने बदले की भावना से ग्रस्त होकर 8 जुलाई 2021 को अनिल सिंह को झूठे मुकदमे में फंसाने की साजिश भी की थी।
आरोप : हत्या की रची गई थी साजिश, ससुराल से किया था अपहरण
गाजीपुर। मुकदमे के अनुसार, शिकायतकर्ता अनिल सिंह की हत्या करने के इरादे से ससुराल से उसका अपहरण कर लिया गया था। आरोप है कि एसपी चंदौली अमित कुमार द्वितीय और स्वाट टीम प्रभारी इंस्पेक्टर राजीव कुमार सिंह, सर्विलांस प्रभारी एसआई अजीत कुमार सिंह, थानाध्यक्ष बबुरी, एसआई सत्येंद्र विक्रम सिंह, हेड कांस्टेबल आनंद सिंह, अमित कुमार यादव, कांस्टेबल भुल्लन यादव, चालक स्वाट टीम, कांस्टेबल राणा प्रताप सिंह और कांस्टेबल आनंद कुमार गौड़ ने सादे कपड़ों में में 5 सितंबर 2021 को शाम 5:30 बजे सफेद रंग की बिना नंबर प्लेट की बोलेरो से अनिल सिंह की ससुराल ग्राम-बड़हरा, थाना नन्दगंज, जिला गाजीपुर पहुंचे और वहां से कांस्टेबल अनिल सिंह का अपहरण कर लिया था।
इसके बाद बेटी खुशबू सिंह ने अपहरण की सूचना डॉयल 112 पर दी थी। थानाध्यक्ष नंदगंज को भी सूचित किया। इस पर उसकी जान बच सकी। मगर दो दिन तक अवैध तरीके से अभिरक्षा में रखकर और फर्जी दस्तावेज तैयार करके 7 सितंबर 2021 को झूठे मुकदमें में फंसा दिया। पशु क्रूरता अधिनियम समेत विभिन्न धाराओं में फंसाकर चालान कर दिया था। इस मामले में नंदगंज थाने में तहरीर दी गई मगर मुकदमा दर्ज नहीं किया गया। इस पर पीड़ित ने कोर्ट की शरण ली, जहां से मुकदमा दर्ज करने का आदेश हुआ।
इन पर दर्ज हुआ मुकदमा, ये है तत्कालीन तैनाती स्थल
- अमित कुमार द्वितीय - पुलिस अक्षीक्षक चंदौली
- राजीव कुमार सिंह-प्रभारी निरीक्षक थाना कोतवाली, चंदौली
- अजीत कुमार सिंह-स्वाट टीम प्रभारी, चंदौली
- सत्येन्द्र कुमार यादव- क्राइम ब्रांच प्रभारी, मिर्जापुर,
- आरक्षी आनंद कुमार गौड़-थाना चकरघट्टा, चकरघट्टा, चंदौली
- आरक्षी राणा प्रताप सिंह-चकरघट्टा, चकरघट्टा, चंदौली
- आरक्षी अमित सिंह- पुलिस लाइंस, चंदौली
- मुख्य आरक्षी भुल्लन यादव-चकरघट्टा, चकरघट्टा, चंदौली
- आरक्षी देवेन्द्र कुमार सरोज-सर्विलांस सेल, चंदौली
- आरक्षी प्रेम प्रकाश यादव-सर्विलांस सेल, चंदौली
- आरक्षी नीरज कुमार मिश्र-सर्विलांस सेल, चंदौली
- सत्येन्द्र विक्रम सिंह-कार्यवाहक प्रभारी निरीक्षक, धानापुर, चंदौली
- आरक्षी अंकित सिंह-थाना बबुरी, बबुरी, चंदौली
- आरक्षी गौरव राय-सैय्यदराजा, सैयदराजा, चंदौली
- आरक्षी रोहित कुमार-बबुरी, बबुरी, चंदौली
- मुख्य आरक्षी मनोज कुमार-बबुरी, बबुरी, चंदौली
- मुख्य आरक्षी आनंद सिंह-स्वाट टीम, चंदौली
- आरक्षी अजीत कुमार-सर्विलांस सेल, चंदौली
हाईकोर्ट में 28 नवंबर को देना था जवाब, 27 की देररात दर्ज किया मुकदमा
गाजीपुर। शिकायतकर्ता अनिल सिंह के वकील के मुताबिक, पुलिस को 28 नवंबर को हाईकोर्ट में जवाब देना था कि अब तक मुकदमा क्यों नहीं दर्ज किया। इस पर पुलिस ने 27 नंवबर की रात 12.22 बजे मुकदमा दर्ज कर अगले दिन हाईकोर्ट को अवगत करा दिया।
शिकायतकर्ता अनिल कुमार सिंह ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में प्रार्थना-पत्र देकर न्याय की गुहार लगाई थी। मामले में कोर्ट ने 21 सितंबर 2024 को मुकदमा दर्ज करते हुए विवेचना का आदेश नंदगंज पुलिस को दिया था। मुकदमा दर्ज न होने पर शिकायतकर्ता ने वकील के माध्यम से प्रार्थना पत्र देखकर कोर्ट को इसकी जानकारी दी। वकील के मुताबिक, इस पर 10 अक्तूबर को थानाध्यक्ष ने कोर्ट को बताया कि प्रकरण में उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है। निगरानी दाखिल की गई है, आदेश की प्रतीक्षा की जा रही है, इसके चलते मुकदमा दर्ज नहीं किया गया। इसके बाद अनिल कुमार सिंह ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर कर दी। हाईकोर्ट ने 12 नवंबर को सुनवाई करते हुए थानाध्यक्ष से पूछा था कि अब तक मुकदमा क्यों नहीं दर्ज किया गया, इसके लिए 28 नवंबर की तिथि तय की थी। मुकदमा दर्ज करने के बाद पुलिस ने शिकायकर्ता को इसकी जानकारी देकर बृहस्पतिवार को अपराह्न थाने बुलाया। घटना से संबंधित जानकारी एकत्र करने के लिए उनकी ससुराल भी गई।