फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाकर महिला की संपत्ति हड़पने के मामले में पुलिस ने रविवार को छह आरोपियों पर मुकदमा दर्ज किया। साथ ही फर्जी प्रमाणपत्र कहां से जारी हुए हैं, इसकी भी जांच शुरू कर दी है।
पीड़ित अतीकुर्रहमान ने बताया कि उसके बड़े चाचा रजाउर्रहमान का निधन वर्ष 1983 में हो गया था। इसके बाद चाची हसीना बेगम संपत्ति की वारिस बनी थीं। उनकी कोई संतान नहीं थी। उन्होंने चल और अचल संपत्ति उसके नाम कर दी थी। चाची हसीना बेगम का निधन 21 जुलाई 2001 को हो गया। इसके बाद नगर पालिका के रिकॉर्ड में 20 अगस्त 2001 को दर्ज हुआ था। पीड़ित ने पुलिस को बताया कि दिल्ली निवासी हामिद खलील ने 13 अगस्त 2022 को एक फर्जी शपथपत्र देकर हसीना बेगम के निधन की तिथि पांच जून 1999 दर्ज कराई और फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करवा लिया। उसके साथ छह लोगों ने मिलकर इस जाली दस्तावेज का उपयोग कर तहसील में कई भूखंड खरीदकर 50 लाख रुपये से अधिक की धोखाधड़ी की। पीड़ित के अनुसार इस पूरे षड्यंत्र में भू-माफिया प्रवृत्ति का एक व्यक्ति शामिल है, जिसके खिलाफ पहले से ही कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। पीड़ित ने पुलिस अधीक्षक से दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की मांग की। प्रभारी निरीक्षक प्रमोद कुमार सिंह ने बताया कि दिल्ली निवासी हामिद खलील‚ शाहिद खलील, जाहिद खलील, आबिद खलील, माजिद खलील और कानूनगो मोहल्ला निवासी जाहिद सिद्दीकी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।