गाजीपुर। जिले के महर्षि विश्वामित्र स्वशासी राजकीय मेडिकल काॅलेज स्थापित होने के बाद मरीजों की भीड़ बढ़ती जा रही है। गैर प्रांतों एवं जनपदों के मरीजों की दिन प्रति दिन बढ़ रही संख्या ने मुश्किल बढ़ा दी है। वार्डों के बेड भर जाने से स्थानीय मरीजों के तीमारदारों को घंटों खाली बेड की तलाश करनी पड़ती है। भीड़ देख करीब 10 से 20 प्रतिशत मरीजों को उपचार के लिए गैर प्रांतों एवं जनपदों का रुख करना पड़ता है। जबकि मेडिकल कॉलेज प्रशासन 100 बेड खरीदने व एक सप्ताह के अंदर नवनिर्मित भवन में वार्ड संचाललित करने का दावा कर रहा है।
ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों को तहसील व ब्लाक स्तर से उपचार मुहैया कराने के लिए सीएचसी- पीएचसी स्थापित तो कराई गई, लेकिन चिकित्सकीय सुविधाएं ना के बराबर रही। ऐसे में लोगों को बेहतर उपचार के लिए मेडिकल कालेज अस्पताल के लिए रुख करना पड़ रहा है। वहीं जनपद से सटे आजमगढ़, बलिया और बिहार प्रांत के बक्सर से बड़ी संख्या में मरीजों का आने का क्रम शुरू हो गया। स्थिति यह है कि प्रतिदिन करीब 2000 के ऊपर ओपीडी पर्ची कट रही है तो उसमें करीब 500 से 600 मरीज गैर प्रांत व जनपद के शामिल है। वहीं प्रतिदिन करीब आपातकक्ष में करीब 150 पर्ची कटती है तो 40- 50 मरीज अन्य जगहों के होते हैं। ऐसे में भीड़ तो बढ़ती जा रही है, लेकिन बेड की संख्या जस की तस है।
सबसे बड़ी समस्या तो तब आती है, जब अचानक किसी बीमारी से स्थानीय मरीजों की संख्या बढ़ जाती है और वे उपचार के लिए पहुंचते हैं। उनके उपचार को लेकर मेडिकल कालेज प्रशासन को हाफना पड़ता है। इस संबंध में महर्षि विश्वामित्र स्वशासी राजकीय मेडिकल काॅलेज के प्राचार्य प्रोफेसर आनंद मिश्रा ने बताया कि 100 बेड खरीद लिए गए हैं, एक सप्ताह के अंदर नवनिर्मित अस्पताल के वार्ड को संचालित करा दिया जाएगा।