जिले में सोमवार की रात हुई जोरदार बारिश से जहां आम जन-जीवन अस्त-व्यस्त हो गया, वहीं ईंट भट्ठा मालिकों का तो कमर ही टूट गई है। बारिश से कच्ची ईंटें गलकर मिट्टी में तब्दील हो गईं। इसकी वजह से जिले के ईंट भट्ठा संचालकों को करीब सात-आठ करोड़ का नुकसान हुआ है।
इससे पहले 5 दिसंबर से 31 जनवरी तक मौसम खराब रहने से भट्ठों पर ईंट पथाई पूरी तरह से नहीं हो पाई है। जिससे 10 प्रतिशत भट्ठे फूंके गए थे। कुछ संचालकों ने जहां भट्ठा फूंक दिया था, वहीं कुछ लोग फूंकने की तैयारी में थे। लेकिन इसी बीच रविवार की देर शाम शुरू हुई बारिश ने उनकी मंशा पर पानी फेर दिया।
जनपद ईंट निर्माता समिति के अध्यक्ष रजनीकांत राय ने बताया कि पूरे जिले में लगभग 4 सौ ईंट भट्ठे हैं जो व्यापार कर के रूप में सालाना 8 करोड़ रुपये, खनन के रूप में लगभग डेढ़ करोड़ और जिला पंचायत को लगभग 16 करोड़ रुपये देते हैं। बारिश से सात से आठ करोड़ की कच्ची ईंटों का नुकसान हुआ है। अगर मौसम ऐसा ही रहा तो धंधा पूरी तरह से चौपट हो जाएगा। भट्ठों के ठंडे रहने का सर्वाधिक असर मजदूरों पर पड़ेगा। उनकी रोजी-रोटी प्रभावित होगी। साथ ही मजबूरन ईंट के दाम बढ़ाने को विवश होना पड़ेगा।
जनपद ईंट निर्माता समिति के महामंत्री लल्लन सिंह ने राज्य सरकार से अनुरोध किया कि बारिश से हुए नुकसान को देखते हुए समाधान की राशि में भट्ठा मालिकों को छूट दिया जाए।