बिरनो। जनपद ईंट निर्माता समिति गाजीपुर के महामंत्री ललन सिंह ने कहा कि संगठन की लंबी लड़ाई के बाद आखिरकार ईंट भट्ठा संचालकों को बड़ी राहत मिली है। उत्तर प्रदेश सरकार ने 27 जून 2012 से पूर्व संचालित ईंट भट्ठों को मुख्य धारा में लाने के लिए गजट जारी कर दिया है।
उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव ने समस्त क्षेत्रीय अधिकारियों (आरओ) को निर्देश जारी कर दिया है। इसके तहत 27 जून 2012 से पूर्व संचालित ईंट भट्ठों को सहमति (कंसेंट) जारी करने में जिला पंचायत रसीद, रॉयल्टी जमा चालान, वैट प्रमाण पत्र आदि में से किसी एक सरकारी दस्तावेज के आधार पर प्रदूषण नियंत्रण विभाग द्वारा सहमति जारी की जाएगी। समिति महामंत्री ने बताया कि जितने वर्ष की सहमति जारी कराई जाएगी, उसके साथ एक वर्ष की फीस का तीन गुना पेनाल्टी के रूप में जमा करना होगा।
उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि वर्तमान में वायु एवं जल की सहमति शुल्क 15 हजार रुपये प्रतिवर्ष है। यदि कोई भट्ठा मालिक पांच वर्ष की सहमति के लिए आवेदन करता है तो उसे 75 हजार रुपये फीस और 45 हजार रुपये पेनाल्टी के रूप में जमा करना होगा। उन्होंने कहा कि सरकार के इस निर्णय से प्रदेश में ईंट भट्ठों की संख्या बढ़ेगी, सरकार को राजस्व मिलेगा और मजदूर वर्ग को भी रोजगार मिलेगा।