जनपद ईंट निर्माता समिति की बैठक रविवार को एक होटल में हुई। इस मौके पर अध्यक्ष रंजनीकांत राय ने कहा कि न्यायालय और राष्ट्रीय हरित ट्रिब्यूनल की ओर से मिट्टी खनन पर पर्यावरणीय सहमति लेना आवश्यक कर दिया गया है। जबकि ईंट भट्टे कुटीर उद्योग में आते हैं।
जिले में ईंट भट्ठा संचालन के लिए पांच नवंबर को लखनऊ में धरना प्रदर्शन आयोजित कर सरकार का ध्यान आकृष्ट कराया जाएगा।
कहा कि ईंट भट्टों के बंद हो जाने से सबसे ज्यादा प्रभावित गांव के गरीब लोग होंगे। वे रोजगार के रूप में ईंट भट्टों पर काम कर अपना-जीवन यापन करते हैं।
भट्टों के संचालन नहीं होने से प्रदेश में बेरोजगारी बहुत बढ़ जाएगी। महामंत्री लल्लन सिंह ने कहा कि अगर भट्टों का संचालन नहीं हुआ तो विकास के सभी कार्य ठप हो जाएंगे।
साथ ही केंद्र और प्रदेश सरकार की योजनाएं धरी की धरी रह जाएंगी। भट्टों का संचालन बंद होने से प्रदेश सरकार के राजस्व की काफी क्षति होगी।
कहा कि जो लोग भट्टों पर कार्य कर अपने परिवार का पेट पालते थे अब उनका पलायन शुरू हो चुका है। देश की बड़ी कंपनियां कुटीर उद्योग को बंद करना चाहती है।
इस मौके पर सुधीर राय, श्यामनारायण सिंह, बृजलाल राय, रामलाल यादव, प्रमाद पांडेय, रामविलास सिंह, भोला गुप्ता, मुन्ना यादव, अमरजीत यादव, विनोद चौहान, जितेंद्र चौबे, मनोज सिंह आदि मौजूद रहे। अध्यक्षता भग्गन यादव और संचालन संजय सिंह ने किया।