नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में संघ-भाजपा ने भारत के लोकतांत्रिक ढ़ांचे पर हमला करना शुरू कर दिया है। आज यह तय होना है कि देश का लोकतांत्रिक धर्मनिरपेक्ष ढांचा बचेगा या नहीं।
वह रविवार को शहर के लंका मैदान स्थित सभागार में पार्टी के 11वें राज्य सम्मेलन में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि एक ओर जहां यह संकट का दौर है। वहीं यह चौतरफा नए-नए आंदोलनों का भी दौर है। किसानों, मजदूरों, महिलाओं, छात्रों, युवाओं के नए-नए मुद्दों पर आंदोलन सामने आ रहे है। आंदोलन की इसी कड़ी में दो सितंबर को मजदूर संगठनों की राष्ट्र व्यापी हड़ताल होने जा रही है, जो मोदी सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ निर्णायक संघर्ष का ऐलान करेगी। माले महासचिव ने कहा कि पार्टी न सिर्फ वामपंथी दलों बल्कि देश के तमाम जन आंदोलन की एकता की दिशा में गंभीर प्रयास कर रही है। बिहार विधान सभा चुनाव में पार्टी की सोच के आधार पर वामपंथी एकता बन रही है। कहा कि आल इंडिया पीपुल्स फोरम के बैनर तले देश भर के जनांदोलन की शक्तियों को एकताबद्ध किया जा रहा है। भविष्य में एक बड़ी और निर्णायक लडाई के लिए वामपंथी क्रांतिकारी शक्तियों को तैयार रहना होगा।
सीपीएम के पूर्व राज्य सचिव एसपी कश्यप ने कहा कि मोदी सरकार मजदूर आंदोलनों का दमन कर रही है। संघर्षों के बल पर हासिल अधिकारों पर हमला कर रही है। उद्घाटन सत्र में भाकपा के इम्तियाज अहमद, एसयूसीआई के शैलेन्द्र कुमार ने विचार व्यक्त किए। सम्मेलन में पार्टी के पोलित ब्यूरो सदस्य स्वदेश भट्टाचार्य, राज्य सचिव रामजी राय, भाकपा के अमेरिका यादव, राव विरेन्द्र आदि उपस्थित थे। अध्यक्षता तीन सदस्यीय अध्यक्ष मंडल कृष्णा अधिकारी, जयप्रकाश नरायण तथा श्रीराम चौधरी ने की। अतिथियों का स्वागत ईश्वरी प्रसाद कुशवाहा तथा संचालन केंद्रीय कमेटी के सदस्य सुधाकर यादव ने किया।