खानपुर। थाना क्षेत्र के औड़िहार-जौनपुर मार्ग पर खानपुर बाजार में बुधवार को दिन में तेज रफ्तार बाइक सड़क किनारे नीम के पेड़ से टकरा गई। दुर्घटना में बाइक सवार युवक की मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस ने शव को कब्जे में ले लिया। उधर हादसे की सूचना मिलते ही घर में कोहराम मच गया।
जौनपुर जिला के चंदवक थाना क्षेत्र के रसड़ा गांव निवासी राजकुमार यादव (30) के छोटे भाई की लड़की की मंगलवार को शादी थी। बुधवार की सुबह वह वाराणसी जनपद के चौबेपुर थाना के टेकुरी गांव निवासी अपने मामा को बाइक से घर छोड़ने के लिए गया था। वहां से वापस लौटते समय दिन में करीब साढ़े 12 बजे जौनपुर-औड़िहार मार्ग पर खानपुर बाजार के पास एक कार को ओवरटेक कर रहा था। इसी दौरान सड़क किनारे नीम के पेड़ से बाइक की टक्कर हो गई। गंभीर रूप से घायल होने पर राजकुमार की मौके पर ही मौत हो गई। दुर्घटना के बाद मौके पर लोगों की भीड़ लग गई। लोगों ने इसकी जानकारी पुलिस को दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने आधार कार्ड से मृतक के पहचान करते हुए दुर्घटना की जानकारी उसे परिजनों को दी। पुलिस ने शव को कब्जे में ले लिया। बाद में परिवार के लोग भी थाना पहुंच गए। शव पर नजर पड़ते दी बिलखने लगे। इस संबंध में थाना प्रभारी निरीक्षक सुनील सिंह ने बताया कि मृतक बड़े भाई रामअवध यादव इत्फाकियां घटना होने की तहरीर दी है। लिखा-पढ़ी के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया।
पहले उठी बिटिया की डोली, बाद में बड़े पिता की अर्थी
खानपुर। ऊपर वाला भी कभी-कभी किसी को ऐसा जख्म दे, देता है कि वह उसे ताउम्र नहीं भूल पाता है। कुछ ऐसा ही जख्म दिया मृतक राजकुमार यादव के परिवार को। 19 मई को राजकुमार के छोटे भाई के लड़की की बारात आई थी। शादी संपन्न होने के बाद सुबह उसकी विदाई हुई। इसके बाद राजकुमार अपने मामा को बाइक से छोड़ने के लिए चौबेपुर निकल गया। परिजन अब-तब उसके घर आने की राह निहार रहे थे। इसी बीच जैसे ही उसके मौत की खबर आई, घर में कोहराम मच गया। सूचना पर थाना पहुंचे मृतक के बड़े भाई रामअवध यादव बिलखते हुए यह कह रहा था कि शादी में पूरी रात मेरा भाई जगा था, शायद उसे छपकी आ गए और कालरूपी पेड़ ने उसकी जिंदगी उससे छीन ली। मृतक की पत्नी चार वर्षीय बेटी उजाला को सीने से लगाए बिलखते हुए घटना के लिए ऊपर वाले की दुहाई देती रही। घटना से दुखी लोग आपस में बाते करते हुए कहते रहे कि वाह रे ऊपर वाले की लीला। पहले बिटिया की डोली उठी और बाद में बड़े पिता की अर्थी।