राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सा महाविद्यालय के गेट पर हड़ताल पर बैठे बीएचएमएस इंटर्न व छात्र। स्रोत
गाजीपुर। बीएचएमएस इंटर्न के मानदेय में वृद्धि को लेकर इंटर्न और छात्रों ने शनिवार को राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सा महाविद्यालय के चिकित्सालय की ओपीडी में ताला बंद कर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी। इस दौरान छात्र व इंटर्न हाथों में पोस्ट व बैनर लेकर नारेबाजी भी की। हड़ताल की वजह से सभी चिकित्सकीय कार्य ठप होने से ओपीडी में पहुंचने वाले विभिन्न रोगों के करीब 250 से अधिक मरीजों को बिना इलाज लौटना पड़ा।
राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सा महाविद्यालय के इंटर्न डॉ. ऋषभ खरे, डॉ. दीपक कुमार और डॉ. हसन रजा मलिक ने बताया कि बीएचएमएस के इंटर्नों को 15 वर्षों से मानदेय के रूप में 7,500 रुपये प्रतिमाह मिलता है। इस मानदेय में इन वर्षों में कोई वृद्धि नहीं की गई है। दूसरी तरफ देश में इन वर्षों में महंगाई तेजी से बढ़ी है। वर्तमान समय में राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सा महाविद्यालय के करीब 20 इंटर्नों को बढ़ती दैनिक आवश्यकताओं के बीच इस मानदेय में काफी परेशानी हो रही है। क्योंकि बीएचएमएस इंटर्नशिप केवल एक शैक्षणिक प्रशिक्षण नहीं है। बल्कि, यह एक अनिवार्य रोटेटरी इंटर्नशिप है। इसमें इंटर्न ओपीडी, अस्पताल, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और जिला अस्पतालों में ड्यूटी देकर अपना कर्तव्य निभाते हैं। हम सार्वजनिक स्वास्थ्य और आयुष सेवाओं के विस्तार में भी अपना योगदान देते हैं। वहीं, एमबीबीएस और बीडीएस इंटर्न का मानदेय 2021 में 12,000 रुपये प्रतिमाह था, जो 2026 में इसे बढ़ाकर 25,000 रुपये हो गया है। ऐसे में जब तक हमारी यह मांग को पूरी नहीं होती तब तक यह अनिश्चित कालीन हड़ताल जारी रहेगी। इंटर्नों की इस हड़ताल को महाविद्यालय के बीएचएमएस के अलग-अलग समेस्टरों के करीब 200 छात्र व छात्राओं का भी समर्थन मिला हुआ है। इस मौके पर परिक्रमा प्रसाद, दिनेश, दीपक, रानी, गरिमा, अभिषेक आदि मौजूद रहे।
मानदेय में वृद्धि को लेकर अस्पताल की ओपीडी के गेट पर ताला बंद कर बैठे इंटर्न व छात्रों से हड़ताल वापस करने के लिए महाविद्यालय प्रशासन की तरफ से काफी समझाया गया है। इसके बाद भी इंटर्न व छात्र महाविद्यालय के गेट पर ही अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठे रहे। हालांकि, अस्पताल परिसर में चिकित्सक व अन्य मेडिकल स्टॉफ मौजूद रहे। सामान्य दिनों में अस्पताल की ओपीडी रोजाना करीब 250 से 300 के बीच रहती है। गेट बंद होने की वजह से शनिवार को सभी मरीज बाहर से ही वापस चले गए।-डॉ. राजेंद्र सिंह, प्राचार्य, राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सा महाविद्यालय