गाजीपुर। जिले की निराश्रित महिलाएं पेंशन की तीसरी किस्त की आस लगाए हुए हैं। तीन-तीन माह के अंतराल पर भुगतान होने वाली इस धनराशि को लेकर पात्रों में असंमजस की स्थिति बनी हुई है। जबकि संबंधित विभाग शासन की ओर धन न आने और पात्रों के दस्तावेजों में खामियों का हवाला दे रहा है। आंकड़ों पर गौर किया जाए तो जिले में 51 हजार 64 निराश्रित महिलाएं हैं, जिन्हें पेंशन के रुप में सरकार एक वर्ष में छह हजार का भुगतान करती है।
निराश्रित महिलाओं को जीवन-यापन के लिए सरकार की ओर से लंबे समय से पेंशन दिया जा रहा है, जिससे उन्हें किसी तरह की दिक्कत का सामना न करना पड़े। चार किस्तों में तीन-तीन माह के अंतराल पर पात्र के खाते में 1500-1500 रुपये की दर से पेंशन भेजी जाती है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल, मई, जून, जुलाई, अगस्त एवं सितंबर तक की पेंशन लाभार्थियों के खाते में सात करोड़ 99 लाख 94 हजार 500 रुपये का भुगतान हो चुका है। जबकि अभी ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकांश निराश्रित महिलाएं हैं, जिन्हें या तो इस योजना की जानकारी नहीं या ऑनलाइन आवेदन के बाद भी लाभ नहीं मिल सका है। वे सरकार की इस योजना के लिए कभी ग्राम प्रधान तो कभी ब्लाकों का चक्कर का काटने को विवश हैं, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है। वजह ग्रामीण क्षेत्रों की जिम्मेदारी वीडीओ को दी गई है, जिनकी लापरवाही एवं निष्क्रियता के चलते सरकार की मंशा पर पानी फिरता दिख रहा है।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति बदतर
गाजीपुर। सरकार की ओर संचालित निराश्रित महिला पेंशन योजना का लाभ लेने के लिए पात्र महिलाओं को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम प्रधानों की लापरवाही एवं ब्लाक स्तर पर तैनात कर्मचारियों की मनमानी के चलते इसका लाभ नहीं मिल पाता है। अभी भी अधिकांश पात्र महिलाएं इस योजना से वंचित हैं।
प्रत्येक माह आने वाले नवीन आवेदनों की जांच कर भेज दिया जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में निराश्रित महिलाओं को सरकार की इस योजना का लाभ मिल सके इसकी जिम्मेदारी खंड विकास अधिकारी के पास है। शासन की तरफ से तीसरी किश्त न आने की वजह से समस्या बनी हुई है। - अनिल सोनकर, जिला प्रोबेशन अधिकारी
मैंने पेंशन के लिए कई बार फार्म भरा। फार्म तैयार कराने में सैकड़ों रुपए खर्च हुए। पता नहीं कहां मेरा फार्म रुका पड़ा है। बाकी लोगों को पेंशन मिल रही है, लेकिन मुझे पेंशन आज तक नसीब नहीं हुई। - लालमुनी, हीरानंदपुर
मैं विधवा और वृद्ध दोनों हूं। मुझे पेंशन की बड़ी जरूरत है। कई बार ब्लॉक तहसील का चक्कर भी लगाया। लेखपाल से मिली लेकिन मुझे पेंशन दिलाने के नाम पर कोई आगे नहीं आया। लाचार होकर घर बैठ गई हूं। - लालमनी देवी, नेवादा।
यह पेंशन गरीबी एवं बुढ़ापे का सहारा है। दवा और खानपान के लिए इस पेंशन से काफी राहत है। महंगाई के हिसाब से पेंशन की धनराशि बहुत कम है। इसे बढ़ाया जाना चाहिए। - पद्मावती वर्मा, सैदपुर
सरकार ने विधवा महिलाओं के लिए पेंशन योजना चलाकर बड़ा कल्याण किया है। यह योजना नहीं रहती तो न जाने कितनी महिलाओं को खाने के भी लाले पड़ जाते। छोटी ही धनराशि सही इसी से मुसीबत की गाड़ी पार हो जाती है। - रीता गुप्ता,औडि़हार