गाजीपुर। बेसो नदी पर बना अंग्रेजों के समय का कठवा मोड़ पुल राष्ट्रीय राजमार्ग-29 पर स्थित है। लगभग दो साल पहले पुल का पाया क्षतिग्रस्त होने से भारी वाहनों के आवागमन पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया। पुल बंद होने के कुछ माह बाद जिला प्रशासन ने विकल्प के रूप में नीचे से रास्ता जरूर तैयार किया, लेकिन पिछले साल नदी में आई बाढ़ के बाद वह भी जगह-जगह धंस गया है। महत्वपूर्ण पुल से सटे सत्यदेव डिग्री कालेज, आईटीआई और पालीटेक्निक कालेजों से जुड़े छात्र और अभिभावक के आने-जाने का एकमात्र यही रास्ता है। कोरोना काल में भले ही कालेज बंद चल रहे हों लेकिन अब भी शिक्षक, कर्मचारी तथा अभिभावक रोज आते-जाते रहते हैं। ऐसे में खतरनाक रास्ते से गुजरना जान जोखिम में डालना है।
जिला मुख्यालय से कठवा मोड़ जा रहे राष्ट्रीय राजमार्ग पर अनगिनत गड्ढे देखे जा सकते हैं। कठवा मोड़ से चंद कदम दूरी पर दशकों पुराने पुल के प्रति जिम्मेदारों की बेरुखी ने भारी वाहन चालकों के लिए भयावह रूप अख्तियार कर लिया है। पुल के निर्माण के लिए कुछ दिन पहले जनप्रतिनिधियों ने शिलान्यास कार्य भी किया लेकिन निर्माण कार्य शुरू नहीं होने की स्थिति में हजारों वाहन चालकों के लिए हर दिन मौत से आंखमिचौली होने लगी है। अब जबकि बरसात ने अपना रूख पकड़ लिया है, ऐसे में पुल के पास बेसो नदी का जलस्तर धीरे-धीरे बढ़ने से खड़ी होने वाली नई यातायात चुनौती को लेकर लोगों में अभी से दहशत व्याप्त हो गया है। राष्ट्रीय राजमार्ग पर बना कठवा मोड़ पुल खतरनाक मोड में आ चुका है। इस पुल के क्षतिग्रस्त होने से भारी वाहनों के आवागमन पर रोक तो लगाया गया है, लेकिन अब यह पुल छोटे वाहनों के लिए भी जोखिमपूर्ण हो चुका है। बेसो पुल पर यातायात के दौरान छोटे वाहनों के दोनों तरफ से लगाए गए लोहे के पिलर में टकराने की चुनौती खड़ी हो जा रही है। यह पिलर कुछ दिन पहले प्रशासन ने बड़े वाहनों के आवागमन पर रोक की मंसा से स्थापित किया था। इस बीच बड़े वाहनों के आवागमन के लिए पुल के नीचे से एक वैकल्पिक कच्चे मार्ग की स्थापना की गई थी, जो इन दिनों हादसे की दूसरी समस्या को जन्म देने लगी है। दरअसल इस कच्चे रास्ते पर पड़ने वाले बेसो नदी के पुल पर दोनों तरफ से रैलिंग नहीं है। बेसो पुल के ऊपरी मार्ग और निचले मार्ग पर गड्ढों में अनियंत्रित होकर वाहनों के आपस में टकराने और पुल में गिरने का भय उत्पन्न हो गया है।
लग जा रहा है लंबा जाम...
गाजीपुर। कठवामोड़ बेसो पुल पर जगह-जगह सड़क के गड्ढों में तब्दील होने और रास्ते के संकरा बन जाने की वजह से कठवा मोड़ पर रोज घंटों जाम की समस्या खड़ी हो जा रही है। स्थानीय लोगों ने बताया इस जाम में एंबुलेंस से लेकर पुलिस-प्रशासन की गाड़ियों के पहिए भी थम जा रहे हैं। रात के समय हालात भयावह हो जा रहे हैं, जब अंधेरे में वाहन चालकों को सड़क का सही अंदाजा नहीं मिलने से वह सड़क के गड्ढों में उलझकर बाल-बाल हादसाग्रस्त होने से बच रहे हैं।
जा चुकी हैं कई जान..
गाजीपुर। बेसो पुल पर प्रशासन द्वारा बड़े वाहनों के आवागमन रोकने के लिए लगाए गए लोहे के पिलर पिछले दो साल में करीब छह से अधिक लोगों की जान ले चुका है। आज से करीब दो साल पहले एक डीसीएम के ऊपर सवार करीब आधे दर्जन लोगों की पिलर में टकराने से मौत हो गई थी। अभी यह हादसा लोगों की जेहन से मिट भी नहीं पाया था कि कुछ दिन पहले बेसो पुल के नीचे से गुजर रहे वैकल्पिक मार्ग पर अनियंत्रित होकर एक पिकअप रैलिंग विहीन नदी में गिर पड़ा था और एक नागरिक की इस दुर्घटना में मौत हो गई थी। इन्हीं समस्याओं को देखते हुए कुछ दिन पहले जन प्रतिनिधियों ने पुल निर्माण का उद्घाटन किया लेकिन हजारों वाहनों की फजीहत बने कठवा मोड़ बेसो पुल के जीर्णोंद्घार की राह में कोरोना महामारी रोड़ा बनकर खड़ा गया है।
बेसो पुल पिछले कई सालों से खतरनाक मोड में है। एक तरफ सड़क के गड्ढे तो दूसरी ओर लोहे का पिलर लोगों की जान ले रहा है। - सुरेंद्र वर्मा
राष्ट्रीय राजमार्ग पर बेसो पुल के खतरनाक स्थिति में होने की वजह से हजारों वाहन चालकों की रोज मौत से आमना-सामना होता है। बार-बार वाहन हादसाग्रस्त होने से बच रहे हैं। - मोती
सड़क और पुल के जर्जर होने की वजह से हर रोज घंटों जाम की समस्या खड़ी हो जा रही है। मरीजों को लेकर आवागमन करने वाले एंबुलेंस के इन जाम में फंसने की वजह से कई बार रोगियों की जान पर आफत आ जा रही है। - सुरेश यादव
कुछ दिन पहले पुल निर्माण के लिए उद्घाटन हुआ था। निर्माण सामग्री भी मौके पर गिराया गया। लेकिन निर्माण का कार्य शुरू नहीं हुआ। हजारों जनता की हर रोज फजीहत हो रही है। - राजेश