रेवतीपुर। कोरोना महामारी के बीच रेवतीपुर के किसानों ने केले की खेती को लाभ का सौदा बना लिया है। पारंपरिक और घाटे की खेती से मुंह फेरकर क्षेत्र के कई किसानों ने केले की खेती से बेहतर आमदनी लेना शुरू कर दिया है। रेवतीपुर और आसपास के किसानों ने मौजूदा समय में करीब 300 बीघे केले की खेती कर रखी है। कम निवेश में ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए उन्होंने टिश्यू कल्चर टेक्नोलॉजी को अपनाया है। किसान बताते हैं कि केले के प्रति पौधे की लागत 16 रुपये आ रही है लेकिन यह पौधा लगातार दो वर्षों से आमदनी का स्रोत बनता जा रहा है।
किसानों ने बताया कि प्रति बीघे 800 से 900 की संख्या में केले के पौधे लगाए जा रहे हैं। इसकी खेती में प्रति बीघा 60-70 हजार का खर्च हो जा रहा है। फल और सब्जियों से कम निवेश में वह केले की खेती में ज्यादा मुनाफा कमा ले रहे हैं। केले की खेती में प्रति पौधा 30 किलो तक का उत्पादन संभव हो जा रहा है। नाबार्ड के सुशील कुमार ने बताया कि रेवतीपुर और जमानिया ब्लॉक के बहुत से किसानों ने केले की खेती को अपनाया है। दोनों ब्लॉक में केले की खेती को एक क्लस्टर के रूप में विकसित किया जा रहा है। किसानों को एक कृषक उत्पादक संघ के रूप में जोड़कर मूल्य संवर्द्धन शृंखला के तहत व्यवसायिक रूप में केले की खेती को विकसित किया जाएगा। इस शृंखला से जोड़कर रोजगार के अवसर विकसित करने के साथ ही केले के उत्पादन को प्रोत्साहन दिया जाएगा। कहा कि योजनाओं से बैंकों द्वारा ऋण प्रवाह और समग्र विकास को बल मिलेगा। इस मंशा के साथ नाबार्ड ने पिछले वित्तीय वर्ष में 30 प्रगतिशील किसानों के एक दल को जलगांव भेजा था जहां उन्होंने केले की खेती में उन्नत तकनीक और नई जानकारी हासिल की थी।