मुहम्मदाबाद। बच्छल का पुरा-रामपुर पीपा पुल की प्लेटें रेत से ढक गईं हैं। पुल पर रखी प्लेटें भी बेतरतीब हो गईं हैं। इसका खामियाजा पुल पर आवागमन करने वालों को भुगतना पड़ रहा है।
दो दशक पहले तत्कालीन लोक निर्माण मंत्री कुसुम राय के प्रयास से मुहम्मदाबाद और जमानिया तहसील के दो दर्जन से अधिक गांवों को जोड़ने के लिए पीपा पुल का निर्माण कराया गया था। शासनादेश के अनुसार इस पुल का संचालन 15 अक्तूबर से शुरू होकर 15 जून तक होता है लेकिन इसका निर्माण दो से तीन महीने विलंब से दिसंबर-जनवरी में किया जाता है। बरसात हो या न हो, ठीक 15 जून से इसके ऊपर से आवागमन बंद कर इसे खोल दिया जाता है। इस पुल से मुहम्मदाबाद, सेवराई और जमानिया तहसील क्षेत्र के दो दर्जन से अधिक गांवों के लोगो को गंगा पार कर आने-जाने में सुविधा हो जाती है। इस वर्ष इसके पीपों और लोहे की प्लेटों को कुंभ मेला में भेज दिए जाने से फरवरी में इसका किसी तरह से संचालन शुरू हो सका। कम लोहे की प्लेटों के चलते रेत में वाहनों का आना-जाना कठिन हो गया। गंगा में रामपुर की तरफ रेत में पड़ी प्लेटें पूरी तरह रेत से ढक गईं हैं, जिससे चारपहिया वाहन नाममात्र के ही आ-जा रहे हैं। सिर्फ खेती के कार्य में लगे ट्रैक्टर और छोटे डीसीएम के साथ ही दोपहिया वाहन आते-जाते हैं। अन्य वाहन 40 किमी की दूरी तय कर हमीद सेतु से आते-जाते हैं। प्रचंड धूप और लू में रेत के गरम हो जाने से लोग कम ही आवागमन करते दिखते हैं। अगर दोपहर में कोई दोपहिया वाहन रेत में फंस जाता है तो उसकी मदद करने वाले भी नहीं मिलते। पुल के ऊपर रखी लोहे की प्लेटें भी बेतरतीब हो गई हैं, जिससे इन पर वाहनों को चलाना काफी परेशानी भरा कार्य हो गया है। पीडब्लूडी के मेठ अशोक राय ने बताया कि तेज हवाओं के चलने से रेत प्लेटों पर आ गई है, जिसे साफ कराया जाएगा।