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व्यवस्था से टकराकर जिंदा हैं देश के गरीब

Mon, 31 Aug 2015 11:05 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, गाजीपुर
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केंद्र की मोदी सरकार ने जल, जंगल और जमीन को भी कारपोरेट सेक्टर के हवाले कर दिया है। सरकार ने जनता के साथ वादाखिलाफी की है। अगर भूमिहीन जिंदा हैं तो व्यवस्था से टकराकर। ये बातें भाकपा (माले) के राष्ट्रीय महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने सोमवार को लंका मैदान पर चल रहे भाकपा (माले) के 11वें राज्य सम्मेलन के दूसरे दिन कहीं।
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उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने चुनाव के समय आमजन से किया वादा न निभाकर वादाखिलाफी की है। आलम यह है कि मजदूर, किसान, दलित, आदिवासी समेत रिटायर्ड फौजियों को भी संघर्ष के लिए मजबूर कर दिया गया है। आज भूमिहीन जिंदा है तो अपने संघर्षों की बदौलत। आदिवासियों के जल, जंगल, जमीन को सरकार ने कारपोरेट घरानों के हवाले कर दिया है। यह किसान आंदोलन ही था जिससे सरकार को भू अधिग्रहण अध्यादेश पर झुकना पड़ा। किसान की जमीन और खेती आज दोनों सुरक्षित नहीं है।

 किसानों की आत्महत्या का दौर थम नहीं रहा है। मजदूरों को श्रम कानूनों के जरिये जो आंशिक अधिकार मिले थे, संशोधन के जरिये सरकार उसे खत्म कर देना चाहती है। भाकपा माले दो सितंबर को पूरे देश में मजदूर हड़ताल में मजबूती से उतरेगी तथा मोदी सरकार की नीतियों के खिलाफ प्रतिरोध के संघर्ष को आगे बढ़ाते हुए हड़ताल में हिस्सा लेगी। उन्होंने कहा कि किसानों, मजदूरों, दलितों और अकलियतों को न्याय की उम्मीद नहीं रह गई है। न्याय की लड़ाई राष्ट्रीय स्तर पर तेज की जाएगी।
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उत्तर प्रदेश के राज्य सचिव रामजी राय ने कहा कि पूरे प्रदेश में अपराधी-पुलिस राज चल रहा है। लोकतांत्रिक जनांदोलनों का दमन किया जा रहा है। हत्या, लूट, गैंगरेप, दलित उत्पीड़न की घटनाओं का ग्राफ बढ़ रहा है। भाकपा माले के लोग रोजी, रोटी, मान सम्मान, जमीन, रोजगार और जनसुरक्षा तथा लोकतांत्रिक न्याय के लिए आंदोलन को आगे बढ़ाएंगे। इस मौके पर श्रीराम चौधरी, ओमप्रकाश सिंह समेत पूर्वांचल और प्रदेश के कई जिलों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। 
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