अंधऊ हवाई पट्टी के कायाकल्प की कवायद
केंद्र सरकार विमानन नीति के तहत अंधऊ हवाई पट्टी को पुनर्जीवित करने की कवायद शुरू की है। ऐसा होने के बाद जनपद ही नहीं पूर्वांचल और बिहार राज्यों को इसका फायदा होगा। हवाई पट्टी से जहाजें उड़ान भर सकती हैं। इससे आसपास के जिले ही नहीं पश्चिमी बिहार के भी अनेक जनपद लाभान्वित होंगे। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान शहर से सटे अंधऊ गांव के पास हवाई पट्टी का निर्माण कराया गया था। यह हवाई पट्टी 200 बिगहे में बना है।
वर्तमान में हवाई पट्टी में बने डाक बंगले और रन-वे की देखभाल पीडब्लूडी की ओर से किया जाता है। अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत के जिला संयोजक राघवेंद्र शर्मा ने पहली बार नौ अक्टूबर 2016 को केंद्रीय नागरीक उड्डयन विभाग को पत्र भेजा था। पत्र में अंधऊ हवाई पट्टी को उच्चीकृत और विकसित करने के लिए केंद्र सरकार के विमानन मंत्रालय को छह जनवरी 2017 को पत्र भेजा है। इसके पूर्व भी कई बार सरकार को पत्र भेजा जा चुका है। नागर विमानन मंत्रालय ने पत्र का जवाब देते हुए बताया कि अगर राज्य सरकार चाहे तो अंधऊ हवाई पट्टी से घरेलू उड़ानों का संचालन शुरू हो सकता है।
अंधऊ हवाई पट्टी को एयरपोर्ट बनाने से पूर्वांचल के लोगों को सड़क मार्ग की बजाय हवाई यात्रा करने का विकल्प मिल सकता है। यही नहीं हवाई अड्डा बनने से लोगों को रोजगार भी प्राप्त होगा और पट्टी के आसपास के क्षेत्रों का विकास होगा। इससे जहां आवागमन सुगम होगा, वहीं समय की बचत भी होगी। साथ ही व्यापार को भी बढ़ावा मिलेगा। केंद्र सरकार ने जिस विमानन नीति को मंजूरी दी है। इसके तहत बेहतर कनेक्टिविटी के लिए देश के उपेक्षित हवाई अड्डों को पुनर्जीवित करना है। कुछ दिन पहले राज्य सरकार ने प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा देने की कवायद शुरू की थी।
सरकार ने प्रदेश में स्थित 16 हवाई पट्टियों को पीपीपी माडल से विकसित करने की तैयारी चल रही है। लेकिन उसमें अंधऊ हवाई पट्टी शामिल नहीं है। केंद्रीय नागरीक उ