सिद्धपीठ हथियाराम की शाखा हरिहरपुर कालीधाम मंदिर में महासरस्वती, महालक्ष्मी और महाकाली के रूप में स्थापित तीनों प्रतिमाओं का महत्व है। यहां सच्चे हृदय से दर्शन-पूजन करने से श्रद्धालुओं के सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं। मान्यता है कि तीनों देवियों के दर्शन-पूजन से काल को भी टाला जा सकता है।
सिद्धपीठ हथियाराम के पीठाधीश्वर भवानीनंदन यति महाराज ने सोमवार को श्रद्धालुओं से मां की महिमा का बखान करते हुए कहा कि मंदिर में स्थापित दक्षिणमुखी प्रतिमाएं अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। मंदिर में सबसे पहली प्रतिमा शव के ऊपर स्थापित है। इस मूर्ति के बारे में अपने गुरुजी से सुनी कथा का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि सैकड़ों वर्ष पूर्व स्थापित इस प्रतिमा की एक अंगुली किसी कारणवश टूट गई। इसकी जानकारी होने पर उनके गुरुजी ने खंडित प्रतिमा के स्थान पर दूसरी प्रतिमा स्थापित कराने की मंशा के तहत प्रतिमा हटवाने का काम शुरू कराया। जैसे ही मजदूरों ने प्रतिमा हटाना शुरू किया, मंदिर की छत से रक्त टपकने लगा। यह देखकर मजदूरों ने काम रोक दिया। गुरुजी को इस बात का अनुभव हुआ तो वह मंदिर की तरफ दौड़ पड़े। उन्होंने कहा कि गुरु महाराज ने खंडित प्रतिमा के स्थान पर दूसरी स्थापित कराने के लिए नई प्रतिमा मंगाई थी, उसे इसी प्रतिमा के ठीक बगल में स्थापित करा दिया। दो प्रतिमाएं होने के बाद तीसरी की स्थापना कराया जाना अपरिहार्य हो गया। फलस्वरूप श्वेत प्रतिमा की स्थापना कराई गई। तीनों प्रतिमाएं मां के तीनों रूपों महासरस्वती, महालक्ष्मी और महाकाली के रूप में पूजी जाती हैं। इन प्रतिमाओं का स्पर्श करने से इनकी शक्ति क्षीण होती हैं। इनके अर्चन-वंदन से काल को भी टाला जा सकता है। वासंतिक नवरात्र भर चलने वाले धार्मिक अनुष्ठान में हिस्सा लेकर यज्ञ मंडप की परिक्रमा करने और पीठाधीश्वर का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ यहां आ रही है। श्रद्धालुओं के लिए भंडारा की व्यवस्था की गई है।