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पूर्वांचल में चौधरी चरण सिंह के नाम से खुले कृषि विवि : गोपाल यादव

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गाजीपुर। कचहरी स्थित समाजवादी पार्टी कार्यालय समता भवन में सोमवार को पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की जयंती पर गोष्ठी का आयोजन किया गया। सपा जिलाध्यक्ष गोपाल यादव ने पूर्वांचल में चौधरी चरण सिंह के नाम पर कृषि विश्वविद्यालय खोलने की मांग की। उन्होंने कहा कि चौधरी चरण सिंह किसानों की पीड़ा को अपनी पीड़ा समझने वाले मसीहा थे। उनका मानना था कि देश की तरक्की का रास्ता गांव के खेत और खलिहानों से होकर गुजरता है। सदर विधायक जै किशन साहू ने कहा कि चौधरी चरण सिंह देश के एक महान नेता और अर्थशास्त्री थे। किसानों के हित के लिए सदैव चिंतित रहते थे लेकिन आज देश का किसान का खाद की किल्लत, बढ़े हुए बिजली के बिल, डीजल और पेट्रोल के रोजाना बढ़ते दामों से परेशान है। समस्याओं को लेकर आंदोलित किसानों के साथ भाजपा सरकार सौतेलापूर्णं और संवेदनहीन रवैया अपना रही है। कार्यक्रम का संचालन जिला महासचिव कन्हैया लाल विश्वकर्मा ने किया। इस गोष्ठी में पूर्व विधायक खुर्शीद अहमद, पूर्व जिलाध्यक्ष रामधारी यादव, देवनाथ कुशवाहा, रामावतार विश्वकर्मा, मार्कण्डेय यादव आदि लोग मौजूद रहे
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चौधरी चरण सिंह स्वतंत्रता सेनानी व गांधीवादी थे : रमाशंकर यादव



गाजीपुर। देश के पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की जयंती पर राष्ट्रीय लोकदल की ओर से सोमवार को विकास भवन स्थित उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया। पार्टी के प्रदेश महासचिव रमाशंकर यादव ने कहा कि वह एक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, लेखक, अर्थशास्त्री, राजनीतिज्ञ व गांधीवादी थे। वह कहा करते थे कि जब तक देश से राजनीतिक भ्रष्टाचार खत्म नहीं होगा, तब तक देश की 80 प्रतिशत आबादी जो गांवों में रहती है, उसका भला नहीं हो सकता है। उन्होंने कहा कि वह ईमानदारी, सादगी, संयम व बेदाग सार्वजनिक जीवन के प्रतीक थे। जब वह देश के प्रधानमंत्री बने, तब उन्होंने स्वतंत्र रूप से ग्रामीण विकास की संभावनाओं का आंकलन कर उन्हें क्रियान्वित करने की दृष्टि से ग्रामीण पुनरुत्थान मंत्रालय की स्थापना की। जब-जब किसानों व गरीबों के हितों के लिए संघर्ष करने की बात आएगी, तब तब उनको किसानों की सेवाओं के लिए याद किया जाता रहेगा। राष्ट्रीय लोकदल के प्रांतीय सचिव जितेंद्र राय ने कहा कि वह एक प्रमुख स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। आजादी की लड़ाई में बढ़चढ़कर भाग लिया था। 1930 में नमक सत्याग्रह में वह जेल भी गए थे। 1940 में व्यक्तिगत सत्याग्रह में वह गिरफ्तार हुए थे। इस मौके पर सूर्यनाथ यादव, रामबोध यादव, डॉ. नुरैन अंसारी, सतीश चंद्र यादव, शिवराम सिंह, महेंद्र यादव आदि मौजूद रहे।
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