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प्रवासियों के आने के बाद मनरेगा में काम मिलना हुआ मुश्किल

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गाजीपुर। प्रवासियों के आने के बाद मनरेगा में काम मिलना मुश्किल हो गया है। जिले के कई ग्रामीण क्षेत्रों में एक सप्ताह से लेकर एक माह से अधिक का समय बीत गया, लेकिन अभी तक ब्लाक और ग्राम सभा स्तर से मिलने वाला कोई भी काम नहीं मिला। ऐसे में प्रवासियों को काम देने का वादा निरर्थक साबित हो रहा है। हालांकि कोविड-19 के कारण लॉकडाउन में मनरेगा को श्रमिकों के लिए कार्य का सहारा बताया गया है।
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जिले में तीन लाख 62 हजार 506 जाबकार्ड बने हैं। इसमें एक लाख 95 हजार 847 सक्रिय जाबकार्ड धारक हैं जिनमें दो लाख 21 हजार 65 कार्य पर लगे हैं। कोरोना के कहर के चलते उत्पन्न समस्या की वजह से विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में घर लौटे आठ हजार 509 प्रवासी को भी काम दिया गया। इसके बावजूद आज भी कई ग्रामीण क्षेत्रों में प्रवासियों को कोई काम नहीं मिल रहा है। सादात संवाददाता के अनुसार शिशुआपार गांव के प्रवासी अंकित राजभर, धर्मेंद्र यादव, डोरा के सर्वजीत यादव, अरविंद कुमार, बुढनपुर गांव के सुरेंद्र और विरेंद्र राजभर और डोरिया गांव के नीरज, जयराम एवं सतीश ने कहा कि गांव में काम न मिलने से ये लोग निराश हैं। जब लाकडाउन के दौरान ये लोग मुंबई में थे तो यह सुना था कि घर जाते ही गांव में मनरेगा के तहत काम मिल जाएगा, बैठना नहीं पड़ेगा लेकिन घर पहुंचने पर ठीक इसके उल्टा हुआ। काम की कौन कहे, कोई काम धंधा के लिए पूछने वाला भी नही मिला। जमानिया संवाददाता के अनुसार विकासखंड के 83 ग्राम सभा में करीब 19 राज्योंसे दो हजार 240 प्रवासी मजदूर आए हैं। इसमें कुछ प्रवासियों को रोजगार मुहैयाहुआ, वह भी कौशल के विपरीत। जो मजदूर अपने निजी साधन और अन्य माध्यमों से अपने गांव पहुंचे हैं, उन्हें किसी प्रकार की सुविधा नहीं दी जा रही है। सरकार की ओर से ग्राम पंचायत में निगरानी समिति बनायी गयी है जो गांव में अन्य साधनों से आये मजदूरों की जानकारी विकासखंड में देंगे लेकिन पूरा सिस्टम धरा का धरा है और मजदूर काम की तलाश में दौड़ लगा रहे हैं। मुहम्मदाबाद संवाददाता के अनुसार बरसात के चलते नालों, नहरों आदि के कार्य बंद हो जाने से कुछ मजदूरों का कार्य बाधित हुआ है। उन्हें दूसरा कार्य दिया जाएगा। विकासखंड में गांवों में मनरेगा के तहत मनरेगा के तहत चकरोड फेंकने, पोखरी की खोदाई का कार्य कराया गया लेकिन बारिश हो जाने से मिट्टी का कार्य बंद हो गया है। कुछ गांवों में मनरेगा का बजट समाप्त हो जाने से भी काम बंद हो गया है। खंड विकास अधिकारी सुशील कुमार सिंह ने कहा कि मनरेगा के तहत मजदूरों को हर गांव में काम दिया जा रहा है। अगर किसी प्रवासी को काम न मिल रहा हो तो वह मुझसे आकर मिले जाबकार्ड न होने पर तत्काल उसका जाबकार्ड बनाकर उसे कार्य दिया जाएगा। मनरेगा के अलावा भी प्रवासियों के लिए काम की व्यवस्था की जा रही है। इस संबंध में डीसी मनरेगा दिलीप कुमार सोनकर ने बताया कि हर प्रवासी को उनकी ग्राम सभाओं में काम उपलब्ध करा उनका भुगतान उनके खाते में किया जा रहा है। जिन प्रवासियों को काम नहीं मिला है वह ब्लॉक मुख्यालय पर आकर आवेदन दें उनको काम उपलब्ध कराया जाएगा।
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