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परंपरागत ढंग से मनाया गया अक्षय नवमी का पर्व

Fri, 23 Nov 2012 12:00 PM IST
Ghazipur
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गाजीपुर। अक्षय नवमी का पर्व गुरुवार को पूरे जिले में उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया गया। इसमें महिलाओं ने आंवला के वृक्ष के नीचे लक्ष्मी नारायण का पूजा पाठ किया गया तथा वृक्ष की परिक्रमा की गई। श्रद्धालुओं ने ब्राहमणों को भोजन करा कर दान पुण्य किया। मान्यता के मुताबिक अक्षय नवमी को किया गया पुण्य कभी नष्ट नहीं होता है।
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कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को अक्षय नवमी मनाया जाता है। शास्त्रों के मुताबिक भगवान विष्णु को कार्तिक मास सबसे प्रिय है। आंवला के वृक्ष में भगवान नारायण का वास होता है। इस महीने में ब्रम्ह मुहूर्त में स्नान कर आंवला के वृक्ष की पूजा करने पर भारी पुण्य मिलता है। इस माह में अक्षय नवमी पर्व पर लोग बढ़ चढ़ कर दान पुण्य करते हैं। इसी क्रम में बुधवार को जिले भर में दान पुण्य का सिलसिला बना रहा। महिलाओं ने आंवला के वृक्ष का परिक्रमा कर सुख समृद्धि की कामना की। अधिकतर लोगों ने शाम के समय आंवला के पेड़ के नीचे ही भोजन बना कर ब्राह्मणों तथा सगे संबंधियों को खिलाया। शहर के सकलेनाबाद स्थित श्रीं वेरपुर कुटी स्थित रामजानकी मंदिर के आंवला के वृक्ष के नीचे श्रद्धालुओं की भीड़ बनी रही। लोग परिवार समेत जुटे तथा भोजन आदि की व्यवस्था की। ददरीघाट के पंडित राधेश्याम चौबे ने बताया कि साल भर में एक बार पड़ने वाले इस पर्व पर दान पुण्य अक्षय बना रहता है। तुलसी, धात्री तथा मालती, ये तीनों वनस्पतियां भगवान नारायण को प्रिय हैं। इसका पूजन करने से घर में सुख समृद्धि बनी रहती है। मुहम्मदाबाद संवाददाता के अनुसार अक्षय नवमी पर्व पर गंगा स्नान के लिए भी श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। नगर के शैवटोला में भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने पंडितों को दान पुण्य किया। आंवले के पेड़ के नीचे पंडितों को खिलाने का सिलसिला देर शाम तक चलता रहा।
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