गाजीपुर। जिले में नहरों की सफाई के नाम पर हर वर्ष बड़ा खेल होता है। कार्यदायी संस्थाएं कागज में सफाई कराकर धनराशि हजम कर ले रही हैं। ठीक से सफाई नहीं होने के कारण टेल तक पानी पहुंचने में महीनों लग जाता है, इससे किसानोें की फसलें बर्बाद हो जाती हैं। कई इलाकों में नहरों का अस्तित्व संकट के दौर से गुजर रहा है।
जिले में सिंचाई के लिए नहरों का लंबा जाल बिछाया गया है। जमानिया, देवकली पंप कै नाल, शारदा सहायक सहित कई कैनालों से नहरें निकाली गई हैं। पूरे जिले में लगभग 1460 किलोमीटर लंबी नहरें हैं। देवकली पंप कैनाल प्रथम एवं द्वितीय से सैदपुर तहसील क्षेत्र के साथ ही जखनियां इलाके के खेतों को सिंचित किया जाता है। जमानिया पंप कैनाल से जमानिया तहसील क्षेत्र में सिंचाई की जाती है। जिले में सबसे खराब हालत नहरों की सफाई को लेकर बनी हुई है। कहीं भी कार्यदायी संस्थाएं नहरों की सफाई ठीक से नहीं कराती हैं। देवकली पंप कैनाल को नहरों की सफाई के लिए मनरेगा योजना से भी धन भेजा जाता है। सिंचाई विभाग भी सफाई के लिए पैसा लेता है। इसके बाद भी नहरों में टेल तक पानी नहीं पहुंच पाता है। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि मनरेगा योजना में ट्रैक्टर एवं जेसीबी मशीन से सफाई का कार्य नहीं होगा लेकिन कार्यदायी संस्थाएं इसका भी प्रयोग आसानी से करती हैं। शिकायत करने पर कोई भी व्यक्ति इसकी जिम्मेदारी नहीं लेता है। कई ऐसे इलाके हैं कि जहां पर नहरों को पाट दिया गया है। कासिमाबाद ब्लाक के रामगढ़ पंप कैनाल से निकली नहरों को सलामतपुर से सिधागरघाट के बीच कई स्थानों पर अतिक्रमण कर लिया गया है। शिकायत का भी असर नहीं दिखाई देता। अगर सफाई के नाम पर आने वाले धन की जांच करा दी जाए तो करोड़ों के घपले समाने आ जाएंगे।