गाजीपुर। तहसील परिसीमन विरोधी संघर्ष समिति ने सोमवार को सिटी रेलवे स्टेशन से जुलूस निकाला। हमें आबाद रहने दो, मुझे बरबाद न करो। मुहम्मदाबाद में रहने दो, कासिमाबाद न करो जैसे नारे लिखी तख्तियां लेकर निकाला गया जुलूस विभिन्न रास्तों से होते हुए कचहरी स्थित सरजू पांडेय पार्क पहुंचा। यहां समिति के सदस्यों ने जोरदार प्रदर्शन कर धरना दिया। उन्होंने कहा कि जब तक उनकी मांग नहीं मानी जाती है, तब तक वह इसके लिए संघर्ष करते रहेंगे।
सभा में पूर्व विधायक राजेंद्र यादव ने कहा कि समिति जिला प्रशासन से परिसीमन दोबारा कराकर संबंधित क्षेत्र को मुहम्मदाबाद में ही रखने कर मांग कर रही है। कहा अगर हमारे साथ नाइंसाफी की गई तो हम इसे कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे। पूर्व प्रमुख चंदा यादव ने प्रशासन को आगाह किया कि जब तक इन क्षेत्रों को नई प्रस्तावित तहसील से निकालकर मुहम्मदाबाद में नहीं किया जाता है, तब तक हम खामोश बैठने वाले नहीं है। हम प्रशासन को बाध्य कर देंगे कि मुहम्मदाबाद तहसील के नजदीक के जो क्षेत्र है, उन्हें मुहम्मदाबाद में ही रहने दिया जाए। समिति के महामंत्री रामअवतार शर्मा ने कहा कि 2007 में हमारे क्षेत्र को नई तहसील कासिमाबाद में भेजा गया था, जिसको क्षेत्र के लोगों के सहयोग लड़कर उस परिसीमन को रुकवाया गया। दोबारा 2008 में नया परिसीमन 394 मौजों का बना, लेकिन 2014 में प्रशासन ने लिस्ट भेजी तो हमारे क्षेत्रों की अनदेखी करते हुए 483 मौजों की सूची भेज दी। इसका हम पुरजोर विरोध करते हैं। जब तक हमारी 394 मौजों की सूची को प्रशासन को तहसील बनाने के लिए नहीं भेजेगा, तब तक संघर्ष चलता रहेगा। समिति के कोषाध्यक्ष मुश्ताक अंसारी ने सन् 80 से 2014 तक के परिसीमन का ब्योरा बताया। इस अवसर पर अजय सिंह, फेंकू यादव, विजय राव, गुलाब कुशवाहा, ओमकार कुशवाहा, रामचीज यादव, महेश कुशवाहा, कृष्णानंद राय, धनंजय प्रधान आदि ने विचार व्यक्त किया। धरने पर बैठे छात्र नेताओं ने भी संघर्ष समिति को समर्थन देने का ऐलान किया। इसके बाद राज्यपाल को संबोधित पत्रक एडीएम को सौंपा गया। उन्होंने मंच पर घोषणा किया कि इस पत्रक को राज्यपाल के पास भेज दिया जाएगा और डीएम एवं सीआरओ से इस परिसीमन पर वार्ता की जाएगी। सभा की अध्यक्षता समिति के अध्यक्ष राजदेवानंद ने की।