गाजीपुर। खरीफ सीजन में किसानों को नकली और शोधित धान के बीजों से बचाने के लिए शासन ने कड़ा रूख अख्तियार कर लिया है। शासन ने सभी जिला कृषि अधिकारियों को भेजे गए पत्र में कहा है कि जिलों में किसी भी सूरत में रिसर्च बीजों की बिक्री नहीं की जाएगी। इस तरह के बीजों का वितरण सिर्फ सरकारी गोदामों से किया जाएगा। यदि शिकायत मिली तो तत्काल मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। इसके लिए जिलाधिकारी ने कृषि विभाग की पांच टीमें गठित की है।
जिले में एक लाख 65 हजार हेक्टेयर में धान की खेती की जाती है। बीजों की बिक्री करने के लिए जिला कृषि विभाग के माध्यम से करीब 300 प्राइवेट दुकानों को लाइसेंस दिया गया है। इन दुकानों से बीजों की बिक्री की जाती है। शासन को शिकायत मिली थी कि धान के बीजों की बिक्री के नाम पर दुकानदार बड़े पैमाने पर खेल कर रहे हैं। रिसर्च बीजों की बिक्री करके दुकानदार खरीफ सीजन में लाखों रुपये का वारा न्यारा कर लेते हैं। किसानों को इसका लाभ न मिलकर सीधे नुकसान उठाना पड़ता है। देखा जाए तो धान की एक लाख से अधिक नई और पुरानी वेराइटी है। आठ से दस किस्म के धान ही किसानों में लोकप्रिय हैं। किसान अधिक उत्पादन के झांसे में आकर दुकानदारों से शोधित धान की खरीद कर लेते हैं। इस तरह के बीज पूरी तरह से प्रतिबंधित किए गए हैं। इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए शासन ने सभी जिला कृषि अधिकारियों को पत्र जारी करके कहा कि अब रिसर्च बीज प्राइवेट दुकानों पर नहीं बेची जाएगी। कृषि विभाग के अधिकारी अनुदान पर रिसर्च बीजों का वितरण सरकारी गोदामों से करेंगे। देखा जाए तो जिले में करीब 300 प्राइवेट दुकानदार हैं जो खाद बीज की बिक्री करते हैं। अब इन दुकानदारों को पत्र लिखकर सख्त निर्देश दिया गया है कि किसी भी सूरत में रिसर्च बीजों का वितरण नहीं किया जाएगा। यदि कोई भी दुकानदार बीज की बिक्री करते पाया गया तो उसके विरूद्ध मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। इसके लिए पांच टीमों का गठन किया गया है। इस टीम में उप कृषि निदेशक, जिला कृषि अधिकारी, अतिरिक्त जिला कृषि अधिकारी, उप संभागीय कृषि प्रसार अधिकारी और भूमि संरक्षण अधिकारी शामिल हैं।