आम लोगों की समस्याओं का स्थानीय स्तर पर निस्तारण करने के लिए शुरू हुआ तहसील दिवस सिर्फ नाम भर का ही रह गया है। समस्याओं के निदान की जगह लोगों को अब प्रत्येक तहसील दिवस पर चक्कर काटने की समस्या से जूझना पड़ा रहा है। एक ही समस्या के समाधान के लिए बार-बार तहसील दिवस पर गुहार लगा रहे लोगों का हुजूम सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों की कार्यशौली की पोल खोल रहा है। जिले की सात तहसीलों में 21 मार्च 2017 से अब तक आए कुल 8235 आवेदनों में से 7563 आवेदनों का ही निस्तारण किया जा चुका है। यह कुल शिकायत का 91 प्रतिशत है।
आंकड़ों में तहसील दिवस भले ही उड़ान भर रहा है लेकिन वास्तविकता यह है कि तहसील दिवस पर महज खानापूर्ति की जा रही है। आवेदन का निस्तारण करने के लिए शासन से समय सीमा निर्धारित है। इसके सापेक्ष निस्तारण नहीं किया जा रहा है। इस कारण से आवेदनकर्ता तहसीलों के चक्कर काट रहे हैं। जनवरी से अब तक कासिमाबाद में 206 लोगों की तरफ से आवेदन किया गया लेकिन 145 का ही निस्तारण हो पाया। इसी तरह, सदर तहसील 515 में 347 का निस्तारण हुआ जबकि शेष 168 का निस्तारण नहीं हुआ है। जमानिया तहसील में 186 में 120 का निस्तारण एवं 66 शेष तथा जखनिया तहसील में 475 में 349 का निस्तारण एवं 126 शेष हैं। इसके अलावा मुहम्मदाबाद तहसील में 442 में 341 आवेदनों का निस्तारण एवं 101 बकाया है। नव तहसील सेवराई में जनवरी माह से अब तक दो तहसील दिवस ही आयोजित किए गए हैं जिसमें से अब तक जनवरी माह के ही 68 आवेदन आए, जिसमें से 28 का ही निस्तारण हो पाया। सबसे बड़ी बात है कि फरवरी माह में आयोजित दो तहसील दिवस में से एक भी आवेदन को अब तक पोर्टल पर लोड भी नहीं किया गया है। जिले की सात तहसीलों में सैदपुर तहसील सबसे फिसड्डी है। सैदपुर तहसील में 301 में से 150 आवेदन का निस्तारण हुआ जबकि अभी भी 151 समस्याओं के आवेदन निस्तारण की बाट जोह रहे हैं। लोगों द्वारा दिए गए 91 आवेदन गायब भी हो चुके हैं जिसे इंटरनेट पर चढ़ाया ही नहीं गया है। तहसील दिवस में आवेदनकर्ताओं के बार-बार फरियाद का सिलसिला जारी है। शासन की ओर से इसके लिए एक फीडबैक सेंटर भी बनाया गया है, जो आवेदनकर्ता से उसकी समस्या के निस्तारण के बारे में जानकारी लेता है। अगर आवेदनकर्ता निस्तारण से संतुष्ट नहीं है, तो उसे पुन: अधिकारी को प्रेषित कर गुणवक्तापूर्ण निस्तारण करने का आदेश किया जाता है। पूरी व्यवस्था ढीले अधिकारियों एवं कर्मचारियों को चुस्त करने के लिए बनाई गयी लेकिन यह व्यवस्था कर्मचारियों और अधिकारियों की लापरवाही की भेंट चढ़ती जा रही है। सबसे हैरानी की बात तो यह है कि तहसील दिवस की अध्यक्षता उपजिलाधिकारी से नीचे के अधिकारी नहीं कर सकते हैं, लेकिन जिले के विभिन्न तहसीलों में कई बार तहसीलदार और नायब तहसीलदार से ही तहसील दिवस की अध्यक्षता कराई जाती है। इससे साफ हो जाता है कि अधिकारियों का तहसील दिवस के प्रति रवैया दिन पर दिन टाल-मटोल वाला होता जा रहा है। इसकी महत्ता को गिराने का प्रयास किया जा रहा है।