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भारतीयता के प्रतीक थे लालबहादुर शास्त्री

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गाजीपुर। विभिन्न संगठनों की तरफ से गुरुवार को पूर्व प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री की पुण्यतिथि मनाई गई। इस मौके पर शहर के शास्त्रीनगर स्थित उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया। आयोजित गोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री भारतीयता के प्रतीक थे।
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अखिल भारतीय कायस्थ महासभा से जुड़े लोगों ने पूर्व प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री के पुण्यतिथि पर शास्त्रीनगर स्थित उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित किया। इस मौके पर आयोजित गोष्ठी में संरक्षक डा. एसपी लाल न शास्त्री के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वह जनप्रिय नेता थे। देश के सर्वोच्च शिखर पर रहकर भी विनम्र, सीधी-साधी वेशभूषा में रहे। सरलता और सादगी के प्रतीक थे। अध्यक्षता करते हुए जिलाध्यक्ष अरुण कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि उन्हें उनकी सादगी, देशभक्ति एवं ईमानदारी के लिए मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर विरेश्वर सिन्हा, परमानंद, शैल श्रीवास्तव, संतोष श्रीवास्तव, सत्यप्रकाश, अमरनाथ, आशुतोष, चंद्रप्रकाश, अजय श्रीवास्तव, राकेश, संजय श्रीवास्तव, चुन्नू श्रीवास्तव आदि उपस्थित रहे। कायस्थ चित्रगुप्त महासभा की तरफ से सिटी रेलवे स्थित शिव मंदिर पर गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस मौके पर अध्यक्षता जिलाध्यक्ष संदीप कुमार श्रीवास्तव ने लालबहादुर शास्त्री जी जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। वे एक सच्चे देशभक्त थे। उन्होंने अपना जीवन सादगी से बिताया और गरीबों की सेवा में लगाया। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सभी महत्वपूर्ण कार्यक्रमों एवं आंदोलन में उनकी सक्रिय भागीदारी रही, जिसके परिणाम स्वरूप उन्हें कई बार जेल जेल भी जाना पड़ा। अंत में पूर्व प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री के बताए गए मार्गों पर चलने का संकल्प लिया गया। इस अवसर पर अशोक कुमार श्रीवास्तव, परशुराम लाल, राजेंद्र अस्थाना, केशव लाल, प्रकाश लाल, सुशील चंद्र श्रीवास्तव, अमित श्रीवास्तव, अनिल श्रीवास्तव, शरद श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे। संचालन विजय प्रकाश श्रीवास्तव ने किया।
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