पशु पालन विभाग की ओर से मुख्यमंत्री सहभागिता योजना के तहत छुट्टा पशुओं के संरक्षण हर महीने 8.20 लाख रुपये खर्च किया जाता है। जनपद में 61 पशु आश्रय केंद्र संचालित हैं। इसके बावजूद जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में छुट्टा पशु सड़क, हाईवे व खेत में नजर आ रहे हैं।
मुख्यमंत्री सहभागिता योजना के तहत निराश्रित संरक्षित पशुओं का पालन करने वाले पशु पालकों को अनुदान राशि दी जाती है। इसके तहत 50 रुपये प्रति पशु प्रति दिन के हिसाब से दिया जाता है। जनपद में 428 पशु पालकों को योजना का लाभ दिया जा रहा है। इनके पास 818 संरक्षित पशु हैं।
दरअसल छुट्टा पशु सड़क, हाईवे, खेत व अन्य सार्वजनिक स्थानों पर नजर न आए, इसके लिए दोहरी रणनीति पर कार्य किया जा रहा है। एक ओर शासन के निर्देश पर जनपद में 61 पशु आश्रय केंद्र संचालित हो रहे हैं, तो दूसरी तरह सहभागिता योजना का क्रियान्वयन किया जा रहा है। इन सबके बावजूद शासन की मंशा परवान चढ़ती हुई नजर नहीं आ रही है। खेतों में छुट्टा पशु घूम रहे हैं।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. एके शाही ने बताया कि संरक्षित पशुओं को रखने के लिए जिले में 61 पशु आश्रय केंद्र संचालित हैं। सभी पशु आश्रय केंद्रों पर पर्याप्त भूसा रखने का निर्देश है। साथ ही पेयजल भी सुनिश्चित कराया गया है। छुट्टा पशुओं को लगातार पशु आश्रय केंद्रों में संरक्षित किया जा रहा है।