दुबिहा। कस्बे के संत खडे़श्वरी बाबा रामलीला मैदान में आयोजित भागवत कथा के पूर्व शुक्रवार को काफी श्रद्धा और उत्साह के साथ कलश यात्रा निकाली गई। अयोध्या से पधारे राष्ट्रीय संत आशीष कुमार बापू के सानिध्य में गाजे-बाजे के साथ भव्य कलश यात्रा शुरू हुई। इस दौरान सैकड़ों महिला और पुरुष हाथों में कलश लेकर चल रहे थे। यात्रा पूरे गांव का भ्रमण करते हुए फिर कथा स्थल पर पहुंची। वहां मंत्रोच्चार के बीच कलश स्थापना किया गया।
श्री बापू ने कहा कि श्री भद्भागवत कथा के पूर्व कलश यात्रा के माध्यम से परिक्रमा किया गया है। इसके परिणाम से दैहिक, दैविक तथा भौतिक, ताप, संताप और परिताप तीनों प्रकार के कष्ट कम होते हैं। मां गंगा विष्णुपदी है, इसलिए स्नानार्थी के चरण पड़ते ही विष्णु का रूप प्रदान करती है। जटाशंकरी है इस लिए डुबकी लगाते ही शिव का स्वरूप तथा कलश में जल लेकर चलने पर ब्रम्हा का रूप प्रदान करती है। इस एक कर्म से ब्रम्हा, विष्णु तथा महेश तीनों ही स्वरूपों का आभास हो जाता है। गंगा की अविरल धारा हम सभी को निरंतर कर्म करने की प्रेरणा देती है। गोमुख से पहाड़ी भागों को तय करते हुए गंगा हरिद्वार से मैदानी भाग में आती है। इसके बाद कुरुक्षेत्र, प्रयाग, वाराणसी, गया होते हुए सभी बाधाओं का सामना करते हुए सागर में समाहित होकर गंगासागर बन जाती है। इसी प्रकार हम मनुष्यों के जीवन में विश्वास के साथ कर्म हो तो कठिनाइयों के बावजूद भी लक्ष्य की प्राप्ति किया जा सकता है। कलयुग में कर्म युक्त विश्वास ही फल बन जाता है। विश्वास कभी भी संदेहात्मक नहीं होना चाहिए। संदेह और शंका ही विनाश का कारण बनता है। गीता में भगवान ने कहा है कि शंकायुक्त जीवात्मा विनाश को प्राप्त होता है। अत: विश्वास अचल, अटल और अडिग होना चाहिए। किसी भी सम या विषम परिस्थिति में चलायमान और डिगायमान नहीं होना चाहिए। इस मौके पर कथा के आयोजकों सहित क्षेत्रीय लोग भी मौजूद रहे।