गाजीपुर। बिना वेतन काम कर रहे सहकारी समितियों के कर्मचारियों ने लखनऊ में धरना-प्रदर्शन के दौरान गुरुवार को पुलिस की ओर से लाठीचार्ज करने पर आस्तीन चढ़ा ली। उनके हड़ताल कर देने से सहकारी समितियों में कामकाज पूरी तरह ठप हो गया है। इसके चलते समितियों पर शुक्रवार को ताले लटकते रहे। इससे रबी अभियान पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका से किसान परेशान हैं।
सहकारी समितियों के कर्मचारियों को वेतन नहीं मिलने से उनके सामने भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो गई है। बकाए वेतन सहित तीन सूत्री मांग को लेकर एक नवंबर को लखनऊ में विधानसभा के सामने धरना-प्रदर्शन कर रहे समिति के कर्मचारियों पर पुलिस ने लाठीचार्ज कर उन्हें खदेड़ दिया। बाद में प्रमुख सचिव सहकारिता ने कर्मचारी नेताओं को दीपावली तक हड़ताल न करने का अनुरोध किया लेकिन वार्ता बेनतीजा रहने पर कर्मचारियों ने अपनी तीन सूत्री मांगों राज्य कर्मचारियों के तर्ज पर नियमित वेतन भुगतान, सेवानिवृत्ति की उम्र 62 वर्ष करने एवं बकाए वेतन भुगतान करने की मांग को लेकर हड़ताल शुरू कर दी। इससे पूरे जिले में सहकारी समितियों में कामकाज ठप हो गया है। जिले में सहकारी समिति के कर्मचारियों का छह माह से लेकर पांच वर्ष तक का वेतन बकाया है। कर्मचारियों की कमी के चलते एक सचिव को तीन-चार समितियों का चार्ज मिला हुआ है। समिति कर्मचारियों को समिति के व्यवसाय के आधार पर उनके प्रबंधकीय व्यय खाते में पैसा रहने पर ही वेतन निकलता है। समितियों में सिर्फ उर्वरक वितरण का व्यवसाय रह गया ह्रै। मुहम्मदाबाद विकासखंड के बालापुर समिति से 30 सितंबर को अवकाश ग्रहण किए रामनारायण पांडेय का जून 2015 से वेतन नहीं मिला है। नोनहरा के सचिव चंद्रकेश यादव को अप्रैल 2016 से, बैरान के सचिव रघुनाथ यादव को अक्तूबर 2015 से, सुखपुरा के भृगुनाथ कुशवाहा को अक्तूबर 2016 से वेतन नहीं मिला है। इसी प्रकार बाराचवर विकासखंड के करीमुद्दीनपुर समिति के सचिव अवनीश चौबे जिनके पास ऊंचाडीह, उतरांव एवं करीमुद्दीनपुर संघ का भी अतिरिक्त चार्ज है। 24 महीने से बिना वेतन के हैं। भांवरकोल ब्लॉक के मुर्तजीपुर के सचिव सुदर्शन यादव का पांच वर्ष से वेतन बकाया है। सचिवों ने वेतन निर्धारण एवं बकाया वेतन जब तक नहीं मिलता है तब तक काम पर नहीं आने की चेतावनी दी है।