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गंगा में समा गए कटानरोधी कैरेट

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करंडा(गाजीपुर)। पानी कम होने के बाद भी करंडा के रफीपुर और बड़हरिया में कटान का सिलसिला बना हुआ है। खेत कटकर गंगा में विलीन हो रहे हैं। कटान को रोकने के लिए शासन के निर्देश पर कैरेट में बालू, मोरंग आदि डालकर कटान प्रभावित इलाके में कार्य किए गए। लेकिन कटानरोधी कैरट को भी गंगा बहा ले गई। खास बात यह है कि बरसात के पहले कटान और बाढ़ से बचाने को लेकर काई ठोस कदम नहीं उठाया जाता। हर साल बाढ़ आने और कटान शुरू होने पर जिला प्रशासन की तंद्रा टूटती है। इसके बाद कवायद शुरू की जाती है, इन कार्यों को दिखाकर जमकर धन उगाही भी होती है। ऐसे कार्यों का ग्रामीणों ने समय रहते विरोध किया था, लेकिन ठेकेदार नहीं माना। कटान रुका भी नहीं और चल रही कवायद भी पानी में समा गया।
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गुरुवार की दोपहर तक हुए कटान में बड़हरिया के सुखराम, भागवत और लक्ष्मण की लगभग ढाई विश्वा जमीन गंगा में विलीन हो गई। हालत यह है कि कटान रोकने के लिए बने कैरेट भी पानी में समाते जा रहे हैं। पानी का बहाव इतना तेज है कि सिंचाई विभाग की ओर से कटान रोकने की कवायद टायं-टायं फिस्स हो गई है। बड़हरिया के लाखों की लागत से बनाए गए बांस के कैरेट पानी में समा रहे हैं। प्रशासन के कटान रोकने की कवायद के विफल होने पर गांव के लोगों में निराशा के साथ नाराजगी भी थी। वह इन दिनों हो रहे इस काम को मना कर रहे थे। लोगों ने कहा कि प्रशासन की मनमानी का ही नतीजा है कि सरकारी खजाने का लाखों रुपये, हम लोगों के लाखों की उपजाऊ भूमि के साथ पानी में डूब रहा है। अगर पीपा पुल जमानियां से लाकर यहां किनारे पर लगा दिया गया होता तो शायद यह स्थिति नहीं आती।
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