नगर निकाय चुनाव की मतगणना के परिणाम के बाद अब भीतरघातियों को लेकर राजनीतिक दलों में समीक्षा शुरू होगी। ऐसे लोगों को चिह्नित करने का कार्य किया जाएगा। जो चुनाव में बड़े पैमाने पर दूसरे दलों के प्रत्याशियों को गोपनीय तरीके से वोट पोल कराए हैं। चुनाव परिणाम आने के बाद ऐसे लोगों को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है।
खासकर नगर पालिका परिषद गाजीपुर में भाजपा, सपा और बसपा इस चुनाव को प्रतिष्ठापरक मानकर लड़ रही थी। इससे काफी गहमा-गहमी थी। जिले में नगर का चुनाव 22 नवंबर को हुआ। इस दौरान प्राय: सभी दलों के प्रत्याशी मतदान केंद्रों का दौरा कर यह पता करते रहे कि उनकी स्थिति क्या है। उनके पक्ष में मतदान हो रहा है या नहीं। इस दौरान कार्यकर्ताओं के साथ ही नेताओं और समर्थकों द्वारा उन्हें इस बात से अवगत कराया गया था कि चुनाव हमारे पक्ष में जा रहा था। मतों की गणना के बाद भाजपा प्रत्याशी को सफलता मिलने के बाद खासकर सपा में हार की समीक्षा होनी है। वह इस बात का मंथन शुरू कर देंगी कि आखिरकार इतनी मेहनत करने के बाद भी सफलता क्यों नहीं हाथ लगी। इसके पीछे बूथ स्तर से लेकर पार्टी से जुड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं को अब संदेह की दृष्टि से देखा जाएगा। क्योंकि नेता और कार्यकर्ता शुरू से ही प्रत्याशी को इस बात के लिए आश्वत कराते रहे कि चुनाव पूरी तरह से अपने पक्ष में है। लेकिन मतगणना होने के बाद हार की सच्चाई सामने आई। इससे यह बात सामने आ रही है कि भीतरघात हुआ है। चुनाव परिणाम आने के बाद ऐसे लोगों को पार्टी से बाहर का रास्ता भी दिखाया जा सकता है। इसको लेकर अब भीतरघातियों की बेचैनी भी बढ़ सकती है।
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