औड़िहार। सैदपुर रेलवे स्टेशन के पास 96 करोड़ रुपये की लागत से निर्माणाधीन इलेक्ट्रिक रेल इंजन रिपेयरिंग कारखाना और मेमू शेड का कार्य अभी 80 फीसदी ही हो सका है। 16 दिसंबर 2018 को कारखाने की आधारशिला रखते वक्त रेल विकास निगम लिमिटेड के अधिकारियों ने इलेक्ट्रिक रेल इंजन रिपेयरिंग कारखाना, मेमू शेड को अगस्त 2020 तक तैयार कर लेने का दावा किया था। अब शेष 20 प्रतिशत कार्य को जनवरी 2021 तक पूरा करने का दावा किया जा रहा है। यह कारखाना तैयार होने के बाद रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
इलेक्ट्रिक रेल इंजन रिपेयरिंग कारखाना और मेमू शेड की आधारशिला 16 दिसंबर 2018 को तत्कालीन रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा ने रखी थी। इस कारखाने और मेमू शेड के लिए 96 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। रेल मंत्रालय की तरफ से संचालित रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) के अधिकारियों ने इसे 2020 के अगस्त में तैयार करने का दावा किया था लेकिन शिलान्यास के 24 माह बीत जाने के बाद भी 80 प्रतिशत ही कार्य हो पाया है। अभी इसका 20 प्रतिशत कार्य शेष है जिसे जनवरी 2021 तक पूरा कर लेने का अधिकारियों की ओर से दावा किया जा रहा है। इलेक्ट्रिक रेल इंजन कारखाने में पूर्वोत्तर रेलवे के गोरखपुर, वाराणसी, इलाहाबाद डिवीजन के अलावा पश्चिम बिहार और उत्तर प्रदेश के कई पश्चिमी जिलों के रेल ट्रैक पर दौड़ने वाले इलेक्ट्रिक इंजनों में खराबी आने की स्थिति में उनकी मरम्मत यहीं की जाएगी।
परियोजना निदेशक अतुल कनौजिया की मानें तो मेमू शेड से जुड़े कार्य अंतिम चरण में हैं। इस कारखाने का प्रशासनिक भवन, कर्मचारियों, अधिकारियों के आवास के प्लास्टर आदि का कार्य शेष है। शेड में प्लास्टर, रेल ट्रैक का जोड़, खंभों पर तार बिछाने, अंडरग्राउंड केबिल डालने जैसे कार्य बाकी हैं। कार्यों को देखते हुए जनवरी 2021 तक इस परियोजना का कार्य पूरा होना मुश्किल लग रहा है। देखा जाए तो प्रशासनिक भवन की पूरी फिनिशिंग, अधिकारियों-कर्मचारियों के टॉयलेट आदि बनाने के अलावा कई मशीनों का लगना शेष है। इस कारखाने का स्थलीय निरीक्षण बीते छह नवंबर को रेल संरक्षा आयुक्त लखनऊ उत्तर पूर्वी मोहम्मद लतीफ खान एवं 12 दिसंबर को पूर्वोत्तर रेलवे के महाप्रबंधक विनय कुमार त्रिपाठी एवं मंडल रेल प्रबंधक विजय कुमार पंजियार ने किया था। इन सभी अधिकारियों ने गुणवत्ता में किसी प्रकार की कमी न आने का निर्देश देते हुए काम को समय पर पूरा कर लेने की हिदायत दी थी।
कार्यदायी संस्था के प्रशासनिक अधिकारी जेके गोयल ने बताया कि इस परियोजना के लिए 96 करोड़ रुपये स्वीकृत है लेकिन 78 करोड़ रुपये मिलने है जिसमें निर्धारित अवधि तक परियोजना तैयार कर ली जाएगी। प्रतिदिन एक दर्जन इंजीनियरों, लगभग एक सौ मजदूरों, कर्मचारियों की टीम परियोजना का कार्य कर रही है। कार्य पूरा होने में किसी प्रकार की अड़चन नहीं है।
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रोजगार और व्यापार की संभावनाएं बढ़ीं
औड़िहार। सैदपुर रेलवे स्टेशन के पास जंगल और झाड़ियों की जगह लगभग 12 एकड़ भूमि में बनाया जा रहा इलेक्ट्रिक रेल इंजन कारखाना रेलवे स्टेशन के आसपास रहने वाले लोगों के लिए शुभ संकेत है। इसके बनने से सैदपुर स्टेशन बिजली की दूधिया रोशनी से जगमगा उठा है बल्कि बड़े हाइड्रोजन बल्बों के चलते दूर तक रोशनी बिखरी है। बड़ी संख्या में कर्मचारियों, अधिकारियों का आवास यहां होने से रोजगार और व्यापार की संभावनाएं बढ़ी हैं। आसपास चाय-पान और किराना की दुकानें खुल गई हैं। घर में कामकाज करने के लिए महिलाओं को भी रोजी-रोटी मिल रही है। आगे भी लोगों को इस कारखाने से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
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कभी रास्ते पर लगता था डर, अब हुआ गुलजार
औड़िहार। सैदपुर रेलवे स्टेशन के पास निर्माणाधीन मेमू शेड यहां से होकर गुजरने वाले नागरिकों और यात्रियों के लिए वरदान साबित हो रहा है। स्टेशन के पास संजय वन से होकर जाने वाले नागरिक एवं यात्री शाम होते ही किसी अनहोनी को लेकर सशंकित रहते थे। अब इस मार्ग का रास्ता गुलजार हो गया है। रेलवे स्टेशन को जाने वाला मार्ग का दोहरीकरण कर दिया गया है। स्ट्रीट लाइटों से गुलजार इस रास्ते पर दिन भर आने-जाने वालों की भीड़ एवं दुकानों पर चहल-पहल दिखाई देती है।
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